Saturday, January 28, 2012

" रोज़ सहेज सी सांझ ढले , रोज़ - दिवस आता बसंत !! "

" उजले पीले फूल खिले, मन मेरा , अब दर्पण सा,
  स्नेह सुगंध की अन्जुलियाँ , नयनो की सब अर्पणता !
  अपने संबंधों की सीमा , ज्यों नभ का विस्तार अनंत ,
  रोज़ सहेज सी सांझ ढले , रोज़ - दिवस आता बसंत !! "

    सरस्वती पूजा एवं बसंतपंचमी की शुभकामनाएं !!

         * * * * *  >> सुप्रभात << * * * * *

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