" जब चनारों पर उमीदों ने घर कर लिए ,
मन कनेर के फूल सा, रंग हैं पर बिन सुगंध ! "
" उचाइयां ठीक है, खुद के बूते की हों ,
इक सहारे लिया तो , विकलांग ही हुए !"
मन कनेर के फूल सा, रंग हैं पर बिन सुगंध ! "
" उचाइयां ठीक है, खुद के बूते की हों ,
इक सहारे लिया तो , विकलांग ही हुए !"