Sunday, April 6, 2014

...उस रात वो नहीं था !!

कुछ सपने खिलखिलाते,
कुछ अपने मिलने आते ;
कुछ बातचीत होती,
कुछ फांसले मिटाती !
निष्प्राण तूलिकाएं,
कम्पित तरंग होतीं,
अफ़सोस वो नहीं था,
उस रात वो नहीं था !

वो डायरी का पन्ना,
उस रात लिखा जाता ;
मन जुगनू जगमगाते,
ऐ काश ,वो जो आता !
खामोश सीपियों में,
आनंद ,प्राण पता ;
अफ़सोस वो नहीं था,
उस रात वो नहीं था !

वो  रात महक जाती,
वो  रात चहक जाती  ;
आशाओं कि किताबें ,
उस रात बहक जाती  !
शब्दों  को अर्थ मिलते,
कुछ गीत ,गद्य खिलते ;
अफ़सोस वो नहीं था ,
उस रात वो नहीं था  !

:::   मनीष सिंह