Wednesday, June 6, 2012

एक शब्द चित्र : मानसून की पहली फुहार केरल में !

एक शब्द चित्र :

              वर्ष २०१२ के मानसून की पहली फुहार केरल में कल पड़ी ! एक सयुक्त परिवार के दो बुजुर्ग सदस्य अपने जीवन के बिताये सुनहरे दिनों को आज फिर से याद कर रहे हैं , की वो दिन आज "" हीरे के जड़े ""  दिनों में परिवर्तित हो जाएँ !!


         बारिश की हलकी हलकी फुहारों में आंटी जी बरामदे की चोखट से थोड़ी सी आगे सीढ़ियों के पास एक दीपक जला कर कुछ पाठ कर रही हैं , जिसको अंकल जी कितने ध्यान से सुन रहे हैं ...!
                      बस कुछ वर्षों पहले ही आंटी जी सुबह सुबह उठ कर अंकल जी के लिए फ़िल्टर काफी बनती थीं , इडली , दोसे , वादा , संभार बना कर देती थीं , जिसको खा कर ये श्रीमान दफ्तर जाते थे , शाम को आते ही फिर फे फ़िल्टर काफी , कुछ उपमा और अप्पम और साथ में नारियल का दूध हालाँकि ये सम सुबह खाया जाता है पर कभी कभी शाम को भी प्यार से खा लिया जाता है ..न न खा लिया जाता था !! आज उन्ही दिनों को याद कर के अपने जीवन के सुनहरे पलों को पुख्ता कर रहे हैं ....जिस से आने वाली और युवा पीढ़ी को रिश्तों को प्रगाढ़ करने और सालों साल चलने वाला बनाया जा सके !! बारिश रुक रुक कर हो रही है , हवा हलके हलके चल रही है फुहारों को अपने साथ ले कर दोनों के चेहरों को भिगो रही है , बार बार पड़ती बूंदों को हाथेलियों पोछ कर दोनों चेहरे पर ताज़गी ले आते हैं ....हम और आप इस ताज़गी के बने रहने की प्रार्थना इश्वर से करते हैं ....और आशा करते हैं की दक्षिण के भारत के बुजुर्गों और युवाओं को सहयोग कर के उत्तर , पश्चिम , पूर्वोत्तर , पश्चिमोत्तर को भी ये मानसून अपने स्नेहाशीष से स्पर्श करे ......ताकि जीवन में सहयोग हो और नव उर्जा का स्पंदन , ऋतुओं के माध्यम से परिकल्पित हो ताकि जीवन चलता रहे ....!

                    वर्ष २०१२ का  मानसून आप सभी को शुभ हो .....!

Monday, June 4, 2012

संभलने का न तो वक़्त होता है और न ही कोई औचित्य !! "

" अक्सर हम अपने आसपास घटने वाली घटनाओ को कभी कभी सामान्यतः होने वाले बदलाव मान कर हलके में ले लेते हैं ....किन्तु जब उनका ही असर भारी सा लगता है तब विचारों के तहत उनका विश्लेषण करने का प्रयास करते हैं ....पर तब तक अत्यधिक देर हो चुकी होती है ...और संभलने का न तो वक़्त होता है और न ही कोई औचित्य !! "  घटनाओ को घटने से नहीं रोका जा सकता किन्तु उसके अनुमानित असर को जानते हुए भी सही वक़्त पर कोई कदम नहीं उठाना असल में घटना को सही में घटना बना देता है, अन्यथा ......कोई और भी शब्द का प्रयोग संभव है !!"