" जाने कितनी तितलियों के पंख गिने होंगे ,
रंग बिरंगी सीपियाँ और शंख गिने होंगे !
कितनी ही गौरैयाओं को स्पर्श किया होगा ,
आलिंगन और भावों के कई दंश दिए होंगे !"
" प्रतिपल उठती यौवन की भाप सरीखे हम !
जी हाँ , हरपल , हरदम बिलकुल आप सरीखे हम !!"
- मनीष सिंह
रंग बिरंगी सीपियाँ और शंख गिने होंगे !
कितनी ही गौरैयाओं को स्पर्श किया होगा ,
आलिंगन और भावों के कई दंश दिए होंगे !"
" प्रतिपल उठती यौवन की भाप सरीखे हम !
जी हाँ , हरपल , हरदम बिलकुल आप सरीखे हम !!"
- मनीष सिंह