Wednesday, November 20, 2013

प्लेटफॉर्म पर सर्दी !

गुनगुनाती ठण्ड,
खौलती चाय,
आलाव कि लकड़ी,
डूबती किरणे,
महकता हरश्रृंगार,
दौड़ती कारें,
धुंध में छुपते ,
लैंप पोस्ट,
सब कहते हैं,
सर्दी आ गयी !
किन्तु ,
छोटू अब भी,
हाफ नेकर में है,
कहता है , 
प्लेटफॉर्म पर सर्दी,
कम्बल बटने कि ,
रात और शाम ,
को ही आती है,
जब शहर के
सम्मानित आते हैं !! 
  :::::: मनीष सिंह :::::::