" भूलना और याद न रखना दोनों भिन्न - भिन्न बातें हैं " ....यकीनन ....एक का होना प्राकर्तिक है और दुसरे के लिए हैं खुद को तैयार करते हैं ....किसी विशेष घटना के बाद .....लिकिन ये भी सत्य है की , ये याद ना रखने के प्रयास में हम उस शक्स या घटना को ज्यादा - ज्यादा याद रखा करते हैं की उसको भूलना है ......सही है ना.....? सोचियेगा , सबके साथ होता है ये ...!!