Monday, March 28, 2011

कल कुछ ऐसा हुआ ! जो अच्छा लगता है !!

                     कल कुछ ऐसा हुआ ! जो अच्छा लगता है !!
              " कल , जी बीता हुआ कल , दिनांक २७.०३.२०११ दिन रविवार के सुबह तकरीबन ७:४० का मैं अपनी मोटर सायकल पर दूध लेने के लिए निकला ......बहन के कहा ...सर्फ़ भी लेते आना ..." दूध लिया और सर्फ़ लेने के लिए कोई खुली हुई दूकान तलाशने लगा....अब सब हमारी तरह आराम करने के दिन ...जल्दी उठ कर अपनी सुबह खराब करेगा, लेकिन उम्मीद पे दुनिया कायम है ....तो मैं कभी वसंत रोड , सब्जी मंदी, घंटा घर , चोपला , बजरिया , और नाजाने कहाँ कहाँ ,,,,पर अपने ही लोहिया नगर के बी ब्लाक के मार्केट मैं एक दुकान मिल गयी ....जैन जी की दुकान .....

       वहां एक    बुजुर्ग खड़े थे ! रौबीला चेहरा ....सफ़ेद कुर्ता पायजामा पहने हुए ! मैं भी जयपुरी प्रिंट का फिट फिट कॉफ़ी रंग का कुर्ता और ब्लू रंग की जींस पहन राखी थी ! मैंने कुछ नहीं कहा ....और खड़ा हो गया क्यों की दूकानदार और वो बुजुर्ग बात कर रहे थे......कुछ पलों मैं दूकानदार ने मुझसे पुछा आपको क्या चाहिए ..? मैंने सर्फ़ माँगा ! दूकानदार लेने चला गया ! इस बीच उन बुजुर्ग ने मुझसे पुछा :

बुजुर्ग : कहाँ रहते हो ?
मैं : जी, लाल क्वाटर मैं .
बुजुर्ग : कब से ?
मैं : जी, बचपन से .
बुजुर्ग : अग्रवाल हो ?
मैं : जी नहीं ....छात्त्रिये हूँ.
बुजुर्ग : अच्छा ....मुझे जानते हो ?
मैं : जी.........देखा तो है आपको कोने की कोठी के बाहर कुछ और बुजुर्गों के साथ बैठे.
बुजुर्ग : हाँ बी ...... मैं रहता हूँ......तुम मुझे अच्छे से लगे इस लिए बात करने का मन किया और कर ली....
मैं : जी.....
बुजुर्ग : क्या करते हो ?
मैं : जी मैं नील.......मैं आईटी ...मैं हूँ...ग्रेटर नॉएडा !
बुजुर्ग : अच्छा मेरा बेटा भी ...अ....कंपनी मैं जेनेरल मेनेजर है......आईटी मैं ही...
तुम मुझे अच्छे से लगे और इस लिए मन किया बात करने का ....कहते हुए उन्होंने अपना उल्टा हाथ मेरे सीधे कंधे पर रख दिया .....बड़ा अदभूद एहसास था वो....

इसी बीच दूकानदार ने आवाज दी....आपका सामान !!...मैंने पैसे दिए और उन बुजुर्ग जी को नमस्ते करी और अपनी राह हो लिया !!

एसा भी होता है....!!  कोई आप को कब कहाँ मिलजाए और इतना अच्छा लगे की आप उससे बात करने का मन करने लगे ....तो अपने मन को मत  रोकिये ........बात कर लेनी चाहिए !!
                   ज़िन्दगी जीने के लिए है ...घुटन के लिए इस मैं कोई जगह नहीं होनी चाहिए ....खुश रहने और जीने का नाम ही...ज़िन्दगी है !
                                                 - आपका अपना है - मनीष