Saturday, September 17, 2011

...जुगनुओं की थैलियाँ !!


       " मौन के संसार मैं अब गुनगुनाहट चाहिए,
              आइये कुछ बोलिए की कम पड़े सब बोलियाँ !
                    कई सदी  से  रोशनी  इन    आँगनो   से   दूर  है ,
                              आइये मिल बाँटते हैं जुगनुओं  की थैलियाँ !! "

Tuesday, September 13, 2011

तेरे होने पर ही मेरे होने की ये सारी नीवें !

               रोज़ रोज़ जिस इंसान से आप दूर रहने की कोशिश करते हैं ....दर असल आप सबसे करीब उसी इंसान के ही होते हैं ...... सही है ....!  वैसे हमें ये जीवन जुड़ने के लिए मिला है ... बस जुडे रहिये .... टूटन तो सब के साथ है .. मजा तो जुडे रहने मैं है ...हाँ थोडे समर्पण के साथ ... तब ही आनंद है !!

" मैं सागर हूँ , तुम हो तब ही ,
       मैं पर्वत हूँ , तुम हो तब ही !
            मैं अम्बर हूँ , तुम हो तब ही ,
                 मैं सुगंध हूँ , तुम हो तब ही !! "
                        
" तेरे होने पर ही मेरे होने की ,ये सारी नीवें  !! "

" तेरे होने पर ही पल-पल गहरी हो जाती हैं ,
         सब अतीत की , वर्त्तमान की भाग्य लकीरें !! "
हम सब ये जानते हैं ... हम तब ही हम है जब कोई कहे की आप आप हैं ...और आपको औरों का होने को प्रेरित करे !!
                                              बस आपका ही ..... मनीष सिंह

                              
                             




Monday, September 12, 2011

" माँ " के न होने का अर्थ !!

" माँ " के न होने का अर्थ !!

       आज मैं जब दफ्तर से निकला तो बस गेट पर ही एक बच्चे को अपनी और बड़ी मासूमियत से देखते हुए पाया ! मुझे रोकना पड़ा खुद को ! मैं रुका और इधर उधर देखा की इतने छोटे से बच्चे के साथ कोई है की नहीं ... ...कोई नहीं था ...! अरे इतनी चलती हुई सडक पर इतना छोटा बच्चा अकेले खड़ा है ... , क्यों, कैसे ! कुछ दूर एक आदमी खड़ा था ... मुझे समझ मैं आ गया की वो बच्चा उसके ही साथ है !

आप सोचेंगे क्या खास है इस में जो ब्लॉग पर लिख रहा हूँ !!

अगर उस बच्चे के साथ उसकी माँ होती तो वो उसको कतई अकेला नहीं छोड़ती ! जी हाँ, माँ कभी अपने बच्चो को अकेला नहीं रहेने देती .. अगर माँ हो तो !!

माँ के न होने का अर्थ , बस वैसा ही जैसे की किसी मंदिर मैं मूर्ति ना हो ! 

माँ - ये शब्द अपने आप मैं पूरा विश्व है ... !! 
आपको आपके माँ का आंचल याद है .. जब आप अपने माँ की गोद मैं बेसुध हो कर सो जाते थे ... तब तपती दोपहर मैं माँ का आंचल आपके ऊपर आ जाता था जिस के नीचे आप अपने आप को सुरक्षित मानते हैं ... और होते भी हैं ... कोई भी आप को नुक्सान नहीं दे सकता पर हम असुरक्षित होते हैं जब माँ नहीं होती ... असहाए सा महसूस करते हैं !

आप की गलती होते हुए भी आप को आस पड़ोस से लोगो से जो बचा लेती है वो माँ है ...भले बाद मैं आपको समझाए की जो अपने किया वो सही नहीं था लेकिन अकेले मैं ही... सब के सामने आपको झुकने नहीं देती..  एसा तब नहीं होता जब माँ नहीं होती !

आपकी तबियत ठीक न हो ... आप परेशान हो तो कोई घर पर अगर आप के साथ रहता है ... वो माँ है .. जब तक आप ठीक न हो जाये.. दवा ली की नहीं , बार बार आपके माथे को छु कर देखना की पानी की पट्टी रखनी है की नहीं , अगर ज़रुरत है तो पूरी पूरी रात जाग कर आपके माथे पर पट्टी रखती है ... आँख भी नहीं झपकती .. और आप ठीक हो जाते हैं ... एसा तब नहीं होता जब माँ नहीं होती ... आप को अकेले ही सब करना होता है... हाँ कोई साथ हो तो कुछ देर के लिए ... सारी रात नहीं !

कुछ खाने का मन करे ... माँ कोशिश करती है वो आपको दिलाये ! आज हम सब सक्षम हैं सब कुछ पा जाने के लिए , किन्तु वो आनंद नहीं है ! वो सुरक्षा नहीं महसूस होती !

माँ के ना होने का अर्थ एक खालीपन है , जो कभी भरा नहीं जा सकता ...! 

माँ का न होना अधूरापन है , जो हमेशा रहती है ... बल्कि ये ही आपको आगे बढ़ने को प्रेरणा देता है ... !

माँ आपको बताती ही की आपके लिए काया सही और काया गलत हो सकता है ... और उन्ही दिशानिर्देशों के सहारे से आप अपने लिए रस्ते बनाते हैं ... ये सब नहीं हो पता ...होता है किन्तु कठिनाई से ... जब माँ नहीं होती ... और जीवन बड़ा ही संघर्षपूर्ण लगता है !! सब होते हैं ...पर माँ........ नहीं होती !

" अंधियारों मैं दीपक जैसी , धुप मैं शीतल छाया जैसी , सूनेपन मैं उत्सव जैसी , मेरी माँ , तुम्हारी माँ ...."

ऑफिस मैं आपके खाने से घर की खुशबु नहीं आती , सुबह ऑफिस जाते समय आपका रुमाल आपके सामने नहीं होता , आपकी जुराबे पुरे पुरे हफ्ते गन्दी रहती हैं , सफ़ेद कमीज़ पर आप को मन पसंद का स्वेटर नहीं मिलता , दिन भर की थकान के बाद शाम को आपके सर पर कोई हाथ रखने वाला नहीं होता , किसी दोस्त के यहाँ पर कोई उत्सव हो तो उसको क्या उपहार दिया जाये का सुझाव नहीं मिलता , आफिस से भीग कर घर आयें तो जल्दी से तौलिया नहीं मिलता , आपको सर्दी न लग जाये इस लिए जल्दी से गर्म चाय नहीं मिलती , कभी कभी आप सोचे और वो है अपने बैग मैं सवेरे सवेरे मिले ... एसा नहीं होता , आप को कहीं जाना हो तो आपका सारा सामान समय पर नहीं मिलता ... सब खुद करना होता है !!

बहन और कोई सब कर तो देते हैं ये सब ... पर उनके किये में माँ के होने और.... उसके किये का अर्थ नहीं होता !!

ये कटु सत्य है जो आया है वो ज़रूर जाएगा ... किन्तु समय पर आना और जाना हो तो जीवन अर्थपूर्ण होता है ... माँ के न होने का अर्थ वैसा ही है ... किसी विशाल समुन्दर मैं कोई कश्ती अपने किनारे से भटक गयी हो और हर पल , हर सांस  दिशाहीन होने का खरता बना हुआ हो ...!

सभी माँ के धनि लोगो को बधाई ... आप के हिस्से से कुछ हमें भी दीजिये , आजीवन नतमस्तक रहेंगे !!

                                              - मनीष सिंह