तेज़ बारिश से सडकें लबालब हो चुकी थीं !
आबिद बार - बार दीवार से लटकी पुरानी घडी जो उसके अब्बा उसके जनम से पहले लाए थे, को देखता हुआ सड़क पर आती जाती गाड़ियों में अपनी टैक्सी तलाश रहा था ! चार घंटों बाद उसकी फ्लाईट थी चेन्नै के "कामराज एयरपोर्ट" से पोर्टब्लेयर के लिए और बारिश रुक नहीं रही थी !
अब्बा सोफे पर चुपचाप बैठे थे ! बिजली नहीं थी ! अब्बा ने आबिद को इन्वर्टर पर ही पुरे घर की लाईट जला देने को कहा था ! आज भरा पूरा घर आबिद के भी चले जाने के बाद बिलकुल सूना हो जायेगा ! घर में रौशनी तो थी लेकिन गुमसुम और उदास उदास !
आबिद बार - बार दीवार से लटकी पुरानी घडी जो उसके अब्बा उसके जनम से पहले लाए थे, को देखता हुआ सड़क पर आती जाती गाड़ियों में अपनी टैक्सी तलाश रहा था ! चार घंटों बाद उसकी फ्लाईट थी चेन्नै के "कामराज एयरपोर्ट" से पोर्टब्लेयर के लिए और बारिश रुक नहीं रही थी !
अब्बा सोफे पर चुपचाप बैठे थे ! बिजली नहीं थी ! अब्बा ने आबिद को इन्वर्टर पर ही पुरे घर की लाईट जला देने को कहा था ! आज भरा पूरा घर आबिद के भी चले जाने के बाद बिलकुल सूना हो जायेगा ! घर में रौशनी तो थी लेकिन गुमसुम और उदास उदास !
कोई सात आठ सालों पहले की रही होगी ! आबिद ने बारहवीं के बाद इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था ! होस्टल में दो महीने बिताने का बाद " रमजान " के महीने में घर लौटा था !
दिन भर कोलेज के नए नए दोस्तों से बातें !
भविष्य में कुछ बन जाने के सपने !
ज़िन्दगी में कुछ कर गुजरने की इमानदार ख्वाहिशों से लबरेज़ मन ले कर किशोर आबिद शाम को अपने अब्बा के दफ्तर से आने के इंतज़ार करता था ! बचपन में नुक्कड़ की दूकान से गरम गुलाब जामुन , गर्म समोसे और ब्रेड पकोड़े लाते थे अब्बा , छोटा होने के कारण अपने हिस्से के आलावा और सब बड़ों का भी हिस्सा उसे मिलता था ! नुक्कड़ की दूकान ज्यादा दूर तो नहीं थी लेकिन अब्बा के लाये सामान में जो सुरक्षा कवच होता था वो से खुद खरीद कर खाने में नहीं !
कालेज के दोस्तों से बातें ख़तम होने के बाद वो इंतज़ार करता की कब अब्बा आयें और फिर शाम की इफ्तार की तय्यारी करी जाये ! अब्बा आते थे ! बहुत सा सामान लाते ! आबिद , अम्मा , बड़े दो भाई , भाभी , बहन और जीजा जी सब इफ्तार में शरीक होते !
अब आबिद किशोर हो चला था ! फिर भी घर के सब बड़ों में वो छोटा ही तो था ! कहीं अम्मा कुछ काम बता देतीं तो कभी भाभी , सब के काम ख़ुशी ख़ुशी कर लेता ! अम्मा से मोबाइल रिचार्ज के पैसे मिलते तो भाभी से नेट पैक के ! बहन से नया मोबाइल का वादा ! सब ख़ुशी ख़ुशी चल रहा था !
बड़े भाई ने अपना काम दिल्ली में कर लिया तो वो पुरे परिवार के साथ दिल्ली चले गए ! बीच वाले भाई की सरकारी नौकरी में ट्रान्सफर हुआ तो वो भी रुखसत हो गए ! बहन चेन्नई में ही रहती थीं लेकिन उनका भी तो अपना परिवार है ! अम्मा का सब सोच सोच कर ब्लड प्रेशेर हाई हुआ और एक रात उन्होंने भी साथ छोड़ दिया !
अम्मा के गम में शिरकत करने लोग आये और चले गए ! भाभियाँ , भैया महिना दो महिना रहे फिर चले गए ! बस अब तो हफ्ते बहन ही आ जाती हैं !
घर पर आबिद और अब्बा अकेले रह गए ! अब्बा ने समोसे लाना बंद कर दिया ! नौकरी से रिटायर हो चुके थे ! आबिद कालेज से आने के बाद पास के ही इंस्टिट्यूट में पढ़ाने लगा था ! पैसों की कमी नहीं थे ! खालीपन था ! उम्र कम थी लेकिन समझ ठीक थी ! अब्बा से जितना लगाव था बचपन में उतना अब नहीं रहा ! वो खुद भी सोचता था की ऐसा क्यों है लेकिन कुछ सवाल बिना जवाब के होते हैं ! कभी कभी उलझन होती थी उसको , अब्बा जब कालेज से लौटने पर उसको घर के बाहर घुमते नज़र आते थे ,जबकि उसको ऐसा सोचने का कोई अधिकार नहीं थी !
आबिद के अब्बा मौसम विभाग में बड़े अधिकारी थे हो कर रिटायर हुए थे ! आबिद उनके साथ सब से ज्यादा समय रहा और सब भाइयों बहनों से ज्यादा उसको उनका प्यार मिला और आज वो उनके बारे में ऐसा सोचता है ! स्वार्थ रिश्तों और जिम्मेदारियों को जला देता है और उस की तपिश से खुद भी झुलसता है !
अब्बा : आबिद , आज खाना बनाने वाली नहीं आयगी , हमें बाहर ही जाना होगा !
आबिद : जी , अच्छा !
अब्बा : आज घर साफ़ करने वाली भी नहीं आई तो मैंने खुद ही साफ़ किया लेकिन इतना बड़ा घर कहाँ साफ़ होता है मुझ से !
आबिद : कोई बात नहीं मैं देख लूँगा !
अब्बा : आज तुम्हारे पासपोर्ट के लिए वेरिफिकेशन के लिए पुलिस वाले आये थे , मैंने सब करा दिया !
आबिद : मुझे फ़ोन कर दिया होता !
अब्बा : क्यों मैंने करा दिया तो कुछ गलती हुयी ?
आबिद : अब्बा आप भी जरा सी बार से नाराज़ होते हैं !
अब्बा : ज़रा सी बात , मैं इतनी देर से तुमसे कुछ ना कुछ बोल कर बात करने की कोशिश कर रहा हूँ और तुम हो की हाँ और ना में ज़वाब दे कर बात ख़तम कर रहे हो !
आबिद : तो क्या करू ?
अब्बा कुछ नहीं कहते हुए चाय बनाने चले गए ! आबिद अपने कमरे में चला गया ! इक्कीस साल का आबिद नौकरी की तलाश में था ! कालेज के कम्पस में जो सिलेक्शन हुआ था वो उअको पसंद नहीं थी सो नहीं करी और अब बाहर कहीं मिल नहीं रही ! परेशान था ! अम्मा की फोटो देखता और रोने लगता ! बहन के बच्चों की बातें सुनता की उसको मल्टी नेशनल में ४ लाख के पकेज पर नौकरी मिली है तो और परेशान होता !
दरवाज़ा धीरे से खोलते हुए अब्बा ने बाहर से ही चाय का कप आबिद की तरफ बढ़ा दिया !
आबिद ने उनकी तरफ देखा भी नहीं , और कहा रख दीजिये !
अब्बा को दुःख हुआ पर वो कुछ बोले नहीं और कप रख कर चले गए !
आबिद ये समझता था की उसके अब्बा ने उसके बड़े भाइयों और बहन के लिए उनके बच्चों के लिए बहुत कुछ किया ! सिफारिशें कर के उनको फायदा करवाया लेकिन उसके लिए कुछ नहीं किया इस लिए उसको आज तक पढाई के बाद भी नौकरी नहीं मिली !
अगले दिन कालेज से लौटा तो ड्राइंग रूम के सेण्टर टेबल पर एक सरकारी लिफाफा रखा था आबिद के नाम से !
मौसम विभाग से उसको इंटरव्यू काल था !
आबिद : ये कैसे हुआ ?
आस पास कोई नहीं था उसके सवाल का जवाब देने के लिए !
आबिद ने लिफाफा खोल और पढ़ा अगले हफ्ते ही जाना था चेन्नै में !
आबिद ने अब्बा से पुछा तो अब्बा ने हां में जवाब दिया और सलाह दी की वह दफ्तर में जा कर श्री अन्यांगार जी से मिल लेना मेरे सिनिअर रहे हैं !
शाम को आबिद ढेर सी मिठाइयाँ ले कर घर आया ! अब्बा बहार टहलते मिले ! आज आबिद को उनके ऐसे टहलने पर कोई रंज नहीं था ! अब्बा मिठाई खाइए ! अब्बा को शुगर होने के बावजूद भी उन्होंने एक सुखी पाक खाई ! चालीस दिन की हुई और अब उसकी पहली पोस्टिंग पोर्टब्लेयर की गयी ही थी !
अब्बा सोफे से उठे और बालकनी की तरफ चल दिए !
आबिद अभी भी सड़क की तरफ देख रहा था की अचानक टैक्सी का हॉर्न सुनाई दिया !
अब्बा : आबिद टैक्सी आ गयी !
आबिद : जी अब्बा !
दो ऐयर बैग और एक लैपटॉप !
ठीक है अब्बा अपना ख्याल रखियेगा मैं फ़ोन करता रहूँगा ! दो महीने बाद आने की बात तो करी है देखते हैं ! खाना और दवाइयां टाइम से लीजियेगा ! रुखसाना दी आती जाती रहेंगी ! आज आने वाली थीं लेकिन बारिश की वज़ह से नहीं आई !
अब्बा : ठीक है बेटा तुम जाओ और खुश रहो ! मैं ठीक हूँ !
टैक्सी बारिश की फुहारों के बीच ओझल हो गयी ! अब्बा ने मैं दरवाज़ा बाद किया और घर के अन्दर आ गए और मैं गेट के चौकीदार से अन्दर आने और चाय बनाने को कहा ! चौकीदार फिचले दरवाज़े से अन्दर आया ! सब सुना सुना ! इतना बड़ा घर ! कितने मन से बनवाया था रहमान जी ने सब कटाने को दौड़ता है ! तीन बच्चे ! तीन जगह ! वाइफ़ अल्लाह के पास ! सब अपने अपने हिस्से का साथ निभा कर चले गए ! आबिद भी कब लौटे क्या पता !
साहब शुगर की गोलियां कितनी डालूँ चाय में : चौकीदार ने पुछा !
रहमान साहब : आज फीकी ही दे दो , ज़िन्दगी के तजुर्बों की मिठास और कडवाहट का ही स्वाद बहुत है आज !
चौकीदार ने चाय की प्याली रहमान साहब की तरफ बढ़ा दी और बहार की तरफ चल दिया !
पुरे बंगले में अब बस एक प्याली चाय , सेंटर टेबल पर हलकी नीली जलती लाईट दीवार पर लटकी पुरानी रोमन अंक और पेंडुलम वाली घडी और ऍफ़ एम् रेडिओ पर "रफ़ी" का एक पुराना बजता गाना रह गया था !
" उतना ही उपकार समझ कोई , जितना साथ निभा दे " कोई ना संग मरे …. मन रे तू कहे न धीर धरे …………। ! "
आबिद की फलाईट उड़ चुकी थी ! उड़ने से पहले आबिद ने कई बार कोशिश कर की अब्बा से बात हो जाये लेकिन बारिश के कारण नेटवर्क नहीं मिला … अब्बा के मन में कोई खटास नहीं थी इस बात को लेकर !
सबेरा होने को था अब्बा आज लेट हो गए थे मोर्निंगवाक के लिए जल्दी जल्दी चाय पी कर निकले की कहीं किसी की याद हाथ पकड़ कर रोक ना ले …….लेकिन धुप को कौन बाँध सका है अब्बा तो धुप की तरह बढ़ चले अपने साये को पीछे छोड़ते हुए !

: मनीष सिंह
अब आबिद किशोर हो चला था ! फिर भी घर के सब बड़ों में वो छोटा ही तो था ! कहीं अम्मा कुछ काम बता देतीं तो कभी भाभी , सब के काम ख़ुशी ख़ुशी कर लेता ! अम्मा से मोबाइल रिचार्ज के पैसे मिलते तो भाभी से नेट पैक के ! बहन से नया मोबाइल का वादा ! सब ख़ुशी ख़ुशी चल रहा था !
बड़े भाई ने अपना काम दिल्ली में कर लिया तो वो पुरे परिवार के साथ दिल्ली चले गए ! बीच वाले भाई की सरकारी नौकरी में ट्रान्सफर हुआ तो वो भी रुखसत हो गए ! बहन चेन्नई में ही रहती थीं लेकिन उनका भी तो अपना परिवार है ! अम्मा का सब सोच सोच कर ब्लड प्रेशेर हाई हुआ और एक रात उन्होंने भी साथ छोड़ दिया !
अम्मा के गम में शिरकत करने लोग आये और चले गए ! भाभियाँ , भैया महिना दो महिना रहे फिर चले गए ! बस अब तो हफ्ते बहन ही आ जाती हैं !
घर पर आबिद और अब्बा अकेले रह गए ! अब्बा ने समोसे लाना बंद कर दिया ! नौकरी से रिटायर हो चुके थे ! आबिद कालेज से आने के बाद पास के ही इंस्टिट्यूट में पढ़ाने लगा था ! पैसों की कमी नहीं थे ! खालीपन था ! उम्र कम थी लेकिन समझ ठीक थी ! अब्बा से जितना लगाव था बचपन में उतना अब नहीं रहा ! वो खुद भी सोचता था की ऐसा क्यों है लेकिन कुछ सवाल बिना जवाब के होते हैं ! कभी कभी उलझन होती थी उसको , अब्बा जब कालेज से लौटने पर उसको घर के बाहर घुमते नज़र आते थे ,जबकि उसको ऐसा सोचने का कोई अधिकार नहीं थी !
आबिद के अब्बा मौसम विभाग में बड़े अधिकारी थे हो कर रिटायर हुए थे ! आबिद उनके साथ सब से ज्यादा समय रहा और सब भाइयों बहनों से ज्यादा उसको उनका प्यार मिला और आज वो उनके बारे में ऐसा सोचता है ! स्वार्थ रिश्तों और जिम्मेदारियों को जला देता है और उस की तपिश से खुद भी झुलसता है !
अब्बा : आबिद , आज खाना बनाने वाली नहीं आयगी , हमें बाहर ही जाना होगा !
आबिद : जी , अच्छा !
अब्बा : आज घर साफ़ करने वाली भी नहीं आई तो मैंने खुद ही साफ़ किया लेकिन इतना बड़ा घर कहाँ साफ़ होता है मुझ से !
आबिद : कोई बात नहीं मैं देख लूँगा !
अब्बा : आज तुम्हारे पासपोर्ट के लिए वेरिफिकेशन के लिए पुलिस वाले आये थे , मैंने सब करा दिया !
आबिद : मुझे फ़ोन कर दिया होता !
अब्बा : क्यों मैंने करा दिया तो कुछ गलती हुयी ?
आबिद : अब्बा आप भी जरा सी बार से नाराज़ होते हैं !
अब्बा : ज़रा सी बात , मैं इतनी देर से तुमसे कुछ ना कुछ बोल कर बात करने की कोशिश कर रहा हूँ और तुम हो की हाँ और ना में ज़वाब दे कर बात ख़तम कर रहे हो !
आबिद : तो क्या करू ?
अब्बा कुछ नहीं कहते हुए चाय बनाने चले गए ! आबिद अपने कमरे में चला गया ! इक्कीस साल का आबिद नौकरी की तलाश में था ! कालेज के कम्पस में जो सिलेक्शन हुआ था वो उअको पसंद नहीं थी सो नहीं करी और अब बाहर कहीं मिल नहीं रही ! परेशान था ! अम्मा की फोटो देखता और रोने लगता ! बहन के बच्चों की बातें सुनता की उसको मल्टी नेशनल में ४ लाख के पकेज पर नौकरी मिली है तो और परेशान होता !
दरवाज़ा धीरे से खोलते हुए अब्बा ने बाहर से ही चाय का कप आबिद की तरफ बढ़ा दिया !
आबिद ने उनकी तरफ देखा भी नहीं , और कहा रख दीजिये !
अब्बा को दुःख हुआ पर वो कुछ बोले नहीं और कप रख कर चले गए !
आबिद ये समझता था की उसके अब्बा ने उसके बड़े भाइयों और बहन के लिए उनके बच्चों के लिए बहुत कुछ किया ! सिफारिशें कर के उनको फायदा करवाया लेकिन उसके लिए कुछ नहीं किया इस लिए उसको आज तक पढाई के बाद भी नौकरी नहीं मिली !
अगले दिन कालेज से लौटा तो ड्राइंग रूम के सेण्टर टेबल पर एक सरकारी लिफाफा रखा था आबिद के नाम से !
मौसम विभाग से उसको इंटरव्यू काल था !
आबिद : ये कैसे हुआ ?
आस पास कोई नहीं था उसके सवाल का जवाब देने के लिए !
आबिद ने लिफाफा खोल और पढ़ा अगले हफ्ते ही जाना था चेन्नै में !
आबिद ने अब्बा से पुछा तो अब्बा ने हां में जवाब दिया और सलाह दी की वह दफ्तर में जा कर श्री अन्यांगार जी से मिल लेना मेरे सिनिअर रहे हैं !
शाम को आबिद ढेर सी मिठाइयाँ ले कर घर आया ! अब्बा बहार टहलते मिले ! आज आबिद को उनके ऐसे टहलने पर कोई रंज नहीं था ! अब्बा मिठाई खाइए ! अब्बा को शुगर होने के बावजूद भी उन्होंने एक सुखी पाक खाई ! चालीस दिन की हुई और अब उसकी पहली पोस्टिंग पोर्टब्लेयर की गयी ही थी !
अब्बा सोफे से उठे और बालकनी की तरफ चल दिए !
आबिद अभी भी सड़क की तरफ देख रहा था की अचानक टैक्सी का हॉर्न सुनाई दिया !
अब्बा : आबिद टैक्सी आ गयी !
आबिद : जी अब्बा !
दो ऐयर बैग और एक लैपटॉप !
ठीक है अब्बा अपना ख्याल रखियेगा मैं फ़ोन करता रहूँगा ! दो महीने बाद आने की बात तो करी है देखते हैं ! खाना और दवाइयां टाइम से लीजियेगा ! रुखसाना दी आती जाती रहेंगी ! आज आने वाली थीं लेकिन बारिश की वज़ह से नहीं आई !
अब्बा : ठीक है बेटा तुम जाओ और खुश रहो ! मैं ठीक हूँ !
टैक्सी बारिश की फुहारों के बीच ओझल हो गयी ! अब्बा ने मैं दरवाज़ा बाद किया और घर के अन्दर आ गए और मैं गेट के चौकीदार से अन्दर आने और चाय बनाने को कहा ! चौकीदार फिचले दरवाज़े से अन्दर आया ! सब सुना सुना ! इतना बड़ा घर ! कितने मन से बनवाया था रहमान जी ने सब कटाने को दौड़ता है ! तीन बच्चे ! तीन जगह ! वाइफ़ अल्लाह के पास ! सब अपने अपने हिस्से का साथ निभा कर चले गए ! आबिद भी कब लौटे क्या पता !
साहब शुगर की गोलियां कितनी डालूँ चाय में : चौकीदार ने पुछा !
रहमान साहब : आज फीकी ही दे दो , ज़िन्दगी के तजुर्बों की मिठास और कडवाहट का ही स्वाद बहुत है आज !
चौकीदार ने चाय की प्याली रहमान साहब की तरफ बढ़ा दी और बहार की तरफ चल दिया !
पुरे बंगले में अब बस एक प्याली चाय , सेंटर टेबल पर हलकी नीली जलती लाईट दीवार पर लटकी पुरानी रोमन अंक और पेंडुलम वाली घडी और ऍफ़ एम् रेडिओ पर "रफ़ी" का एक पुराना बजता गाना रह गया था !
" उतना ही उपकार समझ कोई , जितना साथ निभा दे " कोई ना संग मरे …. मन रे तू कहे न धीर धरे …………। ! "
आबिद की फलाईट उड़ चुकी थी ! उड़ने से पहले आबिद ने कई बार कोशिश कर की अब्बा से बात हो जाये लेकिन बारिश के कारण नेटवर्क नहीं मिला … अब्बा के मन में कोई खटास नहीं थी इस बात को लेकर !
सबेरा होने को था अब्बा आज लेट हो गए थे मोर्निंगवाक के लिए जल्दी जल्दी चाय पी कर निकले की कहीं किसी की याद हाथ पकड़ कर रोक ना ले …….लेकिन धुप को कौन बाँध सका है अब्बा तो धुप की तरह बढ़ चले अपने साये को पीछे छोड़ते हुए !

: मनीष सिंह