Saturday, April 19, 2014

… क्योँकि ,कल बारिश थी !

… क्योँकि , कल बारिश थी !

कलियाँ , फूल,
पत्तियाँ और डालियाँ,
तृप्त हो गयीं,
मुस्कुराईं,
आँगन में ,
सड़कों पर,
गलियों में भी !
झुलसाती धूप,
उदास मायूस,
दुबकी थी बादलों में,
क्योकि ,कल बारिश थी !

कल ही वो भूखा सोया,
पत्तियाँ , काग़ज़ ,
लकड़ियाँ और सलाई,
जल ना सकीं !
आग तो जलती रही,
पेट में,
किन्तु ,आग ही,
जल न सकी रात भर,
तृप्ति के लिए,
क्योंकि ,कल बारिश थी !