Wednesday, February 26, 2014

एक कहानी : " अबीर "

सर , शुगर कितनी लेंगे ?  

होटल के कमरा नंबर ४०१ में घुटने के बल बैठते हुए वेटर ने पुछा !  

आप ऐसे ही रख दीजिये मैं खुद ले लूंगा  !  

                     शिखित ने खिड़की से आती धुप से आँखे बचाते हुए कहा ,फिर सफ़ेद दूधिया रंग कि मलमली जयपुरी रजाई कंधों तक खीच ली !

       अरे उठिए सर साढ़े आठ बज गए हैं ! चाय भी ठंडी हो गयी आज , रोज़ तो ६ बजे से अब तक २ कप हो जाती थी आपकी ! नहा कर निकले शिखित के जूनियर कुमार ने अपने बालों पर सफ़ेद तौलिया मलते हुए शिखित को उठाने कि असफल कोशिश करी !

       शिखित में कोई हलचल नहीं , बिस्तर पर औंधा पड़ा बाँहों में चेहरा छुपाये सोता रहा !  कुमार ब्रेकफास्ट करने के लिए दूसरे आर्टिकल्स के साथ होटल के बड़े हॉल कि तरफ बढ़ गया जहाँ होटल कि तरफ से कम्प्लीमेंट्री ब्रेकफास्ट अरेंज्ड था ! जाते-जाते वंशिका ने दरवाजे कि आड़ से जल्दी से शिखित को सोते हुए  एक नज़र देख लिया था , जिसे कुमार ने नोटिस किया था !

       दो दिनों पहले ही दिल्ली कि एक बड़ी चार्टेड ऑकउंटेंसी कि कंपनी कि तरफ से शिखित अपने तीन जूनियर्स के साथ यहाँ जयपुर में एक बड़ी कंपनी के ऑडिट पर आया था !उसका ये लास्ट सेमिस्टर था ,इस लिए वो इस टीम का टीमलीडर था !  उसकी इस  टीम में आर्टिकल कुमार ,वंशिका और अरुणिमा थे !

आज तो मेरा फ़ास्ट है , फ़ास्ट का कुछ मिलेगा यहाँ ! वंशिका ने कुमार से बड़ी असहजता से पुछा !

कुमार : हाँ , रुको पुछ लेता हूँ कहता हुआ कुमार मेनेजर कि तरफ बढ़ गया !

तभी वंशिका कि फ़ोन कि बेल बजी !

अरे , शिखित सर कि कॉल : हाँ सर गुड मॉर्निंग ! : वंशिका बोली !

शिखित : वंशिका ,मैंने तुम्हारे आज के फ़ास्ट के लिए मेनेजर से कल ही बोल दिया था , उसने अरेंजमेंट किया है तुम उसके पास चले जाना या कुमार को भेज दो !

वंशिका : ओ , थैंक यू सो मच सर , कुमार मेनेजर के पास ही गया है ! वैसे आपको कैसे पता कि मेरा आज फ़ास्ट है ?

शिखित : ठीक फिर मैं थोड़ी देर में आता हूँ फ्रेश हो कर  , कुछ अच्छी चीज़ हो तो बचा कर रख लेना मेरे लिए ! बाय !

वंशिका ने मुस्कुराते हुए बाय कहा !

कुमार : अरे वंशिका जी आपके लिए तो विशेष वयवस्था है , शिखित सर ने होटल वालों से कल ही बोल दिया था और लो ये देखो सब फ़ास्ट वालों का खाना आ गया ! तुम्हारा खास ध्यान रख रहे हैं इस बार शिखित सर !

वंशिका : अच्छा जी , वैसे भी शिखित सर सब का ख्याल रखते हैं !

कुमार : पांच साल से तो मैं उनके साथ हूँ , तो तुम ज़यादा जानती हो कि मैं , लड़कियों के बारे में तो कभी इतना ख्याली नहीं देखा उनको जितना तेरे बारे में हैं !

      सब गोल टेबल पर रखी नास्ते कि प्लेटों पर पकौड़ियों कि खुश्बुओं के साथ अनोखे आनंद से सराबोर हो चले थे जिसमे मानसिक तौर पर शामिल कोई और होता है और आनंद किसी और के हिस्से में आता है !

दोस्तों , आप समझ रहे हैं ना ? मैं समझ रह हूँ कि आब सब अच्छे से समझ रहे हैं !

कुछ बचा है कि सब ख़तम कर दिया ! शिखित ने कुमार के कंधे पर हाथ रखते हुए पुछा !

आइये सर , सब कुछ है ! अरुणिमा ने कहा !

सर, ये फ़ास्ट वाली चीज़ें तो इतनी सारी हैं थोड़ी शेयर कीजिये मेरे साथ ! वंशिका बोली !

अच्छा जी हम दोनों को तो छूने भी नहीं दिया था और शिखित सर को शेयर वहा वाह भाई वाह : कुमार ने चुटकी ली !

शिखित और वंशिका ने कोई ज़वाब नहीं दिया मुस्कुराते हुए नाश्ता फिनिश किया फिर सब चल दिए काम पर !

दिन भर काम का सिलसिला चलता रहा ! बीच बीच में सब ने नोटिस किया कि शिखित वंशिका के प्रति ज़यादा सचेत था  ! खाने में , पीने में , ऑडिट के लिए जाते समय वो किस के साथ है , कहाँ क्या देखना है का ख़याल खुद रख रहा था ! 

       ऑफिस ले लौटते समय देर शाम को हवाएं सर्द हो चली थीं ! कंपनी कि टैक्सी से सब होटल कि तरफ चल दिए रस्ते में वंशिका ने बताया इस चोराहे के दूसरी तरफ कि गली में मेरे ताऊ जी का मकान है !

कुमार : ओह, छुपी रुस्तम तीन दिन से हमारे साथ जयपुर में है यहीं से आती जाती है और आज बता रही है कि तेरे ताऊ जी रहते हैं यहाँ !

अरुणिमा : ये ठीक नहीं है वंशिका !

कुमार : चलो आज इसके ताऊ जी को सरप्राइज़ देते हैं !

वंशिखा : नहीं !

शिखित : क्यों ?

वंशिखा : पापा को अच्छा नहीं लगेगा !

अरुणिमा : क्यों क्या हुआ ?

शिखित : ठीक है , चलो जाने दो फॅमिली इशू होगा हमें नहीं डिस्टरब करना चाहिए !

ओके : कुमार और अरुणिमा ने अपनी सहमति दी !

वंशिखा शायद चाहती थी कि इस  सब्जेक्ट पर आगे बात बढे पर अपने सिनिअर के सामने कुछ मौका नहीं था !

टैक्सी होटल के आगे रुकी शिखित  और कुमार ने उतरते हुए वंशिखा और अरुणिमा से   पुछा  तुम्हारे लिए कुछ लाना है हम  ज़रा अभी आते हैं सामने वाली शॉप से !

नहीं आप हो आइये ! अरुणिमा बोली और रेसेप्शन कि तरफ बढ़ गयी !

डिनर के लिए एक ही टेबल पर इकठ्ठा हुए फॉर्मल ड्रेस में  चारो होटल के बेसमेंट में बने बड़े से हॉल में !

हलकी आवाज़ में पियानो कि धुन बज रही थी ! सब एकदम शांत शांत ! नीली रौशनी में नहाते चमचमते शीशे के गिलास ! सलीके से रखी चम्मच और फोर्क !

यहाँ बैठते हैं एक कोने कि टेबल कि तरफ इशारा करते हुए वंशिका बोली !

हाँ हाँ जहाँ बोलो ! अरुणिमा और कुमार एक तरफ और वंशिखा और शिखित एक तरफ बैठे !

हलके फुल्के मौहोल में खाना ख़तम हुआ !

सौफ खाते हुए सब रेसेप्शन कि तरफ बढ़ रहे थे कि होटल मेनेजर ने आ कर रिक्वेस्ट करी :

सर मैडम कल होली है ! क्योकि कल हम होटल बंद रखते है लेकिन आप सब गेस्ट के लिए हम में से कुछ लोगों को आना होगा लेकिन जो नहीं आ सकेंगे उनके लिए हमने छोटा सा प्रोग्राम रख है आप लोग भी इनवाइटेड हैं , प्लीज़ १० मिनिट्स का समय दीजिये !

वंशिखा ने सब कि तरफ देखा और सब कि हाँ थी !

दर असल ऑफिस में शिखित टीम लीडर होता था पर बाकि समय वंशिखा क्यों ? ये आप खूब समझ रहे हैं !

होली का माहौल ! सुन्दर सुन्दर लोग ! साफ़ साफ़ कपड़ों में बैठे थे  !

इन मौकों पर रिश्ते जिन पर कोई रंग नहीं चढ़ा होता , सुर्ख रहते हैं उनको अवसर मिलता है !

रंगीन हो जाने का , तृप्त हो जाने का !

रिश्तों के बंधन का और सुलझन का भी !

दो टेबल्स पर अबीर और गुलाल काँच कि प्लेट्स में सजा कर रखे थे !

मेनेजर ने सब के माथे पर अबीर  लगा कर होली कि शुभकामना दी !

कुमार और अरुणिमा ने एक दूसरे को अबीर लगाया शिखित को वंशिखा ने अबीर लगाया !

रिश्तों अनाम , अनकहे शब्द में  रंगीन हो चले ! 

             दूरियों के द्वार पर करीबियत गुलाल और अबीर के माध्यम से आवाज़ लगाती थी , दूसरी तरफ दोनों के भीतर बैठा आगंतुक रास्ता तकता था कि कब निमंत्रण मिले !

        होली के गुलाबी अबीर कि खुशबू और कोमल सपर्श ने सब कितना  आसान कर दिया, सम्माननीय और विनयपूर्ण तरीके से !

कल ताउजी के घर चलेंगे हम सब : वंशिखा ने कहा , शिखित जैसे उछल पड़ा !

बहुत कठिन है मन मुताबिक चित्र उतार पाना जीवन के सफ़ेद कैनवास पर , होली के गुलाल और अबीर कभी कभी साथ दे जाते हैं , रंगीन रहने के संदेशे के साथ !

सब एक रंग के अबीर में रंगे दूरियाँ मिटाती होली में मशगूल थे !

            दिन कि बढती मलमली धूप में शिखित जीवन के नये रंगों के आनंद में था और उसके हाथों पर लगा अबीर सुर्ख होकर रिश्तों में तरलता ढूँढ रहा था ,तो  वंशिखा  गुलाल - अबीर में लिपटी अपनी अंगुलियों से  दो दिनों के अनुभवों में दोनों का रंगीन भविष्य तलाशती  थी !!

अबीर और गुलाल चेहरों से दूरियों के नक़ाब हटाने में मशगुल थे , हाथों हाथ सफ़र करते हुए   !!


आपका : मनीष सिंह