आज " रवि " नहीं है !!
डूबा नहीं है वो !
छुप सा गया है !
फिर झांकेगा,
कलियों में,
मुस्कुराते फूलों में,
मेरे तुम्हारे साथ,
चाय पीते हुए,
बातों में,
शब्दोँ में,
पलकों के किनारे,
आंसुओं में,
कंधे पर झुकते हुए,
हाथ हिलाते हुए,
बारिश में,
छतरी लिए !
उतरते हुए,
और फिर से,
चढ़ते हुए,
सीढ़ियां, यादों कि !
मेरे और तुम्हारे लिए,
डूबा नहीं है " रवि ",
छुप सा गया है,
हम सब में,
मुस्कुराता हुआ ,
" अंतहीन " पथ का,
अग्रणी हो कर !
मेरे श्रद्धा सुमन " रवि मूल्या " को !
: - मनीष सिंह