"निशान्त" अब तक तीन बार उस कहानी को पढ़ चुका था ! बार बार वो उस कहानी में एक पात्र रूप में खुद को और एक पात्र रूप में "उसको" पाता था, और कल्पना के बहते झरने में डुबकियां लगाता हुआ अपने मन माफिक भविष्य के सपने देखता जाता था !
निशान्त ३ सालों पहले भारतीय वायुसेना में तकनिकी विभाग में चयन होने के बाद एक साल कि ट्रैनिंग और फिर सुदूर दक्षिण में पहली पोस्टिंग के बाद अपने छोटे से शहर रांची लौट रहा था ! घर में माँ और पिता जी के साथ उनकी देख रेख करने वाला उदय था ! जिसे पिताजी ४ साल पहले गाव से लाये थे ! दसवीं के बाद उसको आई टी आई करने के लिए तयारी कर रहा है !
दूसरी गली में उसका भी घर है ! वो ही जिसके साथ निशान्त ने दसवीं में आते ही कुछ नए अनुभव किये ! किसी के लिए मन में ख्याल का भाव ! किसी के लिए उसकी ज़रूरतों को समझने कि समझ ! किसी के ना होने पर जीवन में खालीपन ! किसी के कुछ समय अपने आस पास न होने पर सब ख़तम हो जाने जैसा लगना ! किसी के बस अपने पास ही रहने कि ख्वाहिश ! स्कूल , कॉलेज का समय के जल्दी बीत जाने पर चिंता होना ! शाम के समय बार बार घर के आस पास सायकिल से जान बूझ कर दूकान से गरज़रूरी चीज़ों के खरीदने और फिर उसको वापस करने जाना ! बस एक उद्देश्य , किसी तरह से उसके आस पास रहूँ ! ऐसा अक्सर किया करता था निशान्त !
स्कूल से , कॉलेज से यूनिवर्सिटी और फिर वायुसेना में चयन ! वो और निशान्त बचपन कि गलियों से शहरों कि सड़कों पर घूमने लगे थे ! दोनों के परिवारों को भी ये सब स्वीकार्य था ! वो घंटों एक दूसरे के साथ समय बिताते और घर आते ! सब ने भविष्य भी सोच लिया था ! उसकी एम् एस सी जो वो केमिस्ट्री से थी के ख़तम होने के बाद जैसे ही निशान्त अपनी ट्रैनिंग से लौटेगा दोनों कि शादी कर दी जाएगी !
लेकिन , सब कुछ बदल चूका था अब !
भैय्या चाय पियेंगे ?
दूसरी सीट पर बैठे एक लडके ने निशान्त तो एकटक ट्रैन से बहार देखते हुए पुछा !
निशांत के काल्पनिक झरने का जैसे सारा पानी एकदम से ख़तम हो गया और बोल पड़ा : कहाँ आ गए हैम ?
विपुल : बस चेन्नई के बाद एक स्टेशन ही निकला है !
निशान्त : ओके , ओके ! , तुम कहाँ जा रहे हो दोस्त ?
विपुल : विशखापट्टम् !
निशान्त : वहाँ क्या करते हो ?
विपुल : मैं वहाँ पढता हूँ , इंजीनिरिंग मैकेनिकल , थर्ड सेम है !
आप कहाँ जा रहे हैं : विपुल ने निशान्त से पुछा !
निशान्त : मैं अपने घर जा रहा हूँ , रांची !
विपुल : आपके घर में कौन कौन है ?
निशान्त : माँ, पिता जी , भाई जैसा दोस्त उदय और........
निशान्त किसी एक और का नाम जोड़ते जोड़ते रुक गया !!
विपुल : और कौन भैय्या ?
निशान्त : कोई नहीं , वो तो बस मैं ऐसे ही केह गया !!
विपुल ने कुछ सोच कर उस समय बात पलट दी और निशान्त से पुछा : आज लंच में आप क्या आर्डर करने वाले हो भैय्या ?
निशान्त जैसे चाहता था कि विपुल उससे उस कौन के बारे मैं पूछे लेकिन विपुल ने बाद लंच के तरफ मोड़ दी थी !
निशान्त : मैं तो एग्ग बिरयानी खाऊंगा ! इस ट्रैन में पैक्ड मिलती है और लोकल लोग बना कर बेचते हैं ! केले के पत्ते में पैकिंग विथ प्रॉपर लोकल मसला एंड सॉस ! कई बार खाया है मैंने !
विपुल : तो आज मैं भी वो ही खाऊंगा !
निशान्त : एक एग्ग और एक हैदराबादी बिरयानी मंगवाते हैं शेयर कर के खाएंगे ! मैंने और उसने खूब किया है कॉलेज के दिनों में केंटीन में !
विपुल को मौका मिला और पूछ बैठा : किस के साथ ऐसा किया था आपने भैय्या कॊलेज में ?
निशान्त : मेरी कॉलोनी कि ही एक लड़की है वो !
हमने ग्रैजुएशन साथ में किया ! साथ में ही रहे हमेशा दोस्त कि तरह पर अब नही हैं हम वैसे !
विपुल : क्यों ?
निशान्त : हमारे पेरेंट्स ने भी ये तय किया था कि मेरी ट्रैनिंग के बाद और पोस्टिंग से पहले हैम दोनों कि शादी करा दी जाएगी और मैं ट्रैनिंग पर चला गया !
विपुल : फिर क्या हुआ ?
निशान्त : मेरी ट्रैनिंग ६ महीने ही थी ! दो महीने बिताने के बाद मुझे माँ का फ़ोन आया कि उसकी शादी के लिए उसके घर लोग हमारे घर पर दबाव बना रहे हैं कि जल्दी कीजिये वर्ना एक अच्छा रिश्ता है सेना का ही , लड़का सेना में डाक्टर है और उसकी मामा कि तरफ से रिश्ता है ! माँ और पिता जी ने भी खूब समझाया कि ट्रैनिंग के बाद शादी होनी तो तय है तो फिर ये अचानक क्यों ? वो लोग नहीं माने और उसने भी मुझ से बात नहीं करी ! उसकी शादी उस सेना के डाक्टर से हो गयी !
बिरयानी देना भाई दो : एक एग और एक हैदराबादी ! विपुल ने सीरियस होते माहौल को हल्का करने कि कोशिश करी , बिरयानी से !
ट्रेन एक स्टेशन पर रुकी ! चाय , केले के पकोड़े और दही के साथ दोनों ने बिरयानी का आनंद लिया ! फिर दोपहर के समय खाने के बाद कि नींद आने लगी दोनों को ! ट्रैन अगले ३ घंटो तक नहीं रुकने वाली थी ! ट्रैन के हौले हौले हिचकोले और दोपहर के नींद ऐसा मिलाप कि कुछ और न अच्छा लगे ! दोनों अपनी अपनी सीट पर सो गए !
चाय चाय !
निशान्त कि नीद इस सामान्य आवाज़ से खुली !
एक चाय ले कर अपनी साइड लोवर कि सीट पर बैठ गया !
फिर से उसी कहानी को पढने लगा जिसमे एक लड़की और लड़के बचपन से साथ होते हैं जवानी तक और फिर किसी कारण दोनों कि शादी नही होती ! सबकुछ भुलाकर लड़की अपने पति के साथ अपना जीवन बिताने लगती है ! परिवार सम्भालने लगती है ! एक दिन अचानक उसेक पति के साथ बचपन का वो ही साथ उसके घर आता है डिनर पर जो कि उसके पति का बॉस है ! दोनों एक दूसरे को न पहचाने कि हरकत करते हैं ! फिर दिन रात का मिलना शुरू होता है दोनों का उसके पति कि जानकारी के बिना ! क्यों कि उसका पति उसको ज़यादा टाइम नहीं दे पाता था अपने काम कि वज़ह से तो उसको भी अपने पुराने दोस्त में एक करीबी मिल गया और नए सिरे से ज़िन्दगी शुरू करने कि प्लानिंग करते हैं दोनों ! एक रात जब उसका पति अपनी माँ कि तबियत खराब होने के कारण घर नहीं आता ! दोनों ने एक दूसरे को शाम को फ़ोन किया आज रात को हैम भाग जाएंगे ! शाम हुई ! रात हुई ! फिर आधी रात हुई ! बॉस का फ़ोन नहीं आया ! वो परेशान हो कर इधर उधर घूमती रही ! अगर सुबह हो गयी और मेरा पति आ गया तो क्या होगा ? ऐसा सोच ही रही थी कि अचानक पंखे से किसी चीज़ के टकराकर गिरने कि आवाज़ आयी ! देख तो घोंसले के चिड़ा गलती दे बल्ब कि रौशनी को सुबह समझ कर घोंसले से बहार आ गया था और पंखे से टकरगया और मर गया ! उसने पंखा बंद किया ! और देखा कि पीछे पीछे चिड़िया भी उस मरे चिड़े के पास आयी और १० से १५ मिनट तक कभी उसकी चोंच में दाना , पानी डालने कि कोशिश करी रही और आखिर हार कर वो भी वहीँ मर गई ! बस इस घटना ने उस लड़की का मन बदल दिया ! बॉस का फ़ोन सुभा ४ बजे आया और वो बोला : डियर रात में पार्टी में देर हो गयी इस लिए फ़ोन नहीं कर सका , अभी आ रहा हूँ , तुम तय्यार हो ना ? उस लड़की ने सोचा एक चिड़िया अपने पति के लिए इतना प्यार दिखा सकती है तो मैं उस से भी गयी गुजारी हों हूँ ! अच्छा पति है , सब सुख सुविधाएँ हैं और मैं ये क्या करने चली थी ? उधर से फिर से बॉस ने पुछा ? आर यू रेडी ना बेबी ? उस लड़की ने भरी और गुस्से से जवाब दिया : सॉरी ये रॉन्ग नंबर है और फोन काट दिया !
निशान्त ने अपनी ट्रैनिंग के बाद अपने घर ना जाने का फैसला किया था !
अपनी पोस्टिंग में वो चेन्नई में था ! उसकी उस गर्ल फ्रेंड कि शादी को भी २. ५ साल बीत चुके थे !
उस दिन माँ के फोन के बाद उसने भी माँ से कभी उसका ज़िक्र कभी नहीं किया और परिवार वालों ने भी उसकी भावनाओं का सम्मान करते हुए कभी भी उस को कुछ नहीं कहा और ना ही कुछ बताया !
विपुल : भैय्या अकेले अकेले चाय पी ली आपने ?
निशान्त के ध्यान को एक बार फिर से तोडा विपुल ने !
निशान्त : नहीं भाई तुम सो रहे थे और मेरी नीदं खुल गयी थी इस लिए पी ली ! फिर से ले लेते हैं !
विपुल : ठीक है आप चाय ले कर रखिये मैं फ्रेश हो कर आता हूँ ! केह कर विपुल भारतीय रेल आनंद एक और तरह से लेने को चल दिया ! स्लीपर बगल वाले अंकल जी कि ले कर ! इस मांग कर ट्रैन में टॉयलेट का अलग आनंद हैं !
सुदूर सूरज समुद्र में डूब रहा था ! किनारे पर चलती गोलाकार घूमती ट्रैन से अगले से पिछले डब्बे को देख कर बच्चे खुश हो रहे थे मानो इंजन को देख कर ये पता कर लिया हो जैसे कि इस संसार को कौन चला रहा है का पता कर लिया हो !
विपुल ने चाय का कप हाथों में लेते हुए पुछा : भैय्या और कौन है आपके घर में माँ , पिता जी और उदय के सिवाय ?
निशान्त कि कल्पना कि पतंग ने फिर से उड़ान भरी और बोला ! फिलहाल तो कोई नहीं लेकिन वो ही मेरी बचपन कि दोस्त भी मेरे साथ हो जाये !
विपुल : वो कैसे होगी , उनको तो शादी हो चुकी है अभी अभी आपने बताया !!
निशान्त को काटो तो खून नहीं !
हाँ लेकिन भविष्य किसने देखा है ?
विपुल : फिर भी भैय्या मुझे ये कुछ समझ नहीं आ रहा ! शादी के बाद फिर वो कैसे ??
निशान्त के मन में बहुत कुछ चल रहा था उस कहानी जैसे शायद परिस्थिति बदल जायें और वो उसके पास आ जाए ! लेकिन साथ में ये भी सोच लेता था कि अगर कहानी कि तरह अंतिम समय में उसका मन बदल गया तो क्या होगा ?
निशान्त : हाँ ठीक है , जब मेरी शादी होगी ना मैं तुमको भी बुलावा दूंगा , आ जाना और कौन का पता लग जाएगा ! हा हा हा !
दोनों ने नंबर बदले और सो गए ! विपुल रात में ही विशखापट्टम् उतर गया और अगले दिन निशान्त सुबह सुबह राँची रेलवे स्टेशन पंहुचा !
वो ही खपरेल के घर !
पुरानी चाय कि दूकान !
सायकल पर इडली ,डोसा बेचते हाफ लुंगी डाले अन्ना !
पास के स्कूल में जाते वो ही सफेद शर्ट और खाकी नेकर में बच्चे !
निशान्त ने रिक्शा किया और चल दिया घर कि तरफ !
रस्ते ने सोचता जाता था कि शायद वो दिख जाये क्यों कि सुना था उसका ससुराल रांची में ही है ! अपने स्कूल और कालेज के सामने से होता हुआ घर के करीब पंहुचा ! पहले उसकी बचपन कि दोस्त का मायका पड़ता है ! अनचाहे मन से ही उधर देख ही लिए ! उसकी दोस्त के पिता जी सबेरे कि चाय ले रहे थे ! उन्होंने निशान्त को पहचान लिया !
सोच के उलट उन्होंने ही पुकारा : अरे निशान्त बेटा !
निशान्त ने रिक्शे को रुकने का इशारा किया ! उतर कर उनके पैर छुए और घर कि कुशलता पूछी ?
वो उदास हो गए !
निशान्त : क्या हुआ चाचा जी ?
वो कुछ बोल पाते कि अंदर से रूही बहार आई ! सफ़ेद स्याह कपोड़ों में ! आँखे सूजी हुई ! कोई श्रृंगार नहीं !
निशान्त को देख कर ठिठक गयी !
निशान्त : कैसी हो ?
रूही बिना कुछ कहे उस से लिपट गयी !
रूही के पिता जी ने उन दोनों को अकेले छोड़ दिया और अंदर चले गए !
कुछ देर बाद निशान्त के माता पिता जी के साथ लौटे ! उदय निशान्त का सामान ले कर जा चूका था !
सब चुप थे !
उदय ने चुप्पी तोड़ी !
माँ , पिता जी : अब तो भैय्या दीदी कि शादी हो जाएगी ना ?
सब ने ज़ोर से कहा , हाँ आते सोमवार को ही है !
निशान्त ने रात में विपुल को फ़ोन किया : हेल्लो विपुल , अगले सोमवार को मेरी शादी है और तुम आ रहे हो !
विपुल : अरे कोंग्रेट्स भैय्या ! किस के साथ है ?
निशान्त : उसी के साथ , बचपन कि दोस्त के साथ !
विपुल : ये गलत है भैय्या !
निशान्त : नहीं ये ही सही है !
विपुल : नहीं नहीं बिलकुल गलत है , आप अच्छा नहीं कर रहे हैं और मैं आप कि शादी में नहीं आ रहा हूँ !
निशान्त : अरे मेरी बात तो सुन भाई !
और निशान्त कहने लगा : रूही कि शादी के बाद वो अपने ससुराल चली गयी और में अपनी पोस्टिंग पर ! उसके पति को पोस्टिंग अरुणाचलप्रदेश में मिली ! वहाँ पर किसी घातक बीमारी के कारण उसको सेना कि नौकरी छोड़नी पड़ी और वो घर आ गया ! कुछ दिन बाद यहाँ उसकी डेथ हो गयी ! इस बात कि जानकारी मेरी माँ और पिता को थी लेकिन उन्होंने मुझे कभी नहीं बताया और उदय को भी मना कर दिया था बताने को ! आज जब मैं उसके घर के सामने से गुजर रहा था तो सब ने मुझे देखा और उदय ने भी ! जैसे सब के मन में एक चीज़ थी जो सब करना चाहते थे ! ईश्वर ने एक दाग तो रूही पर लगा दिया लेकिन एक मौका भी दिया और उदय ने सब को इक्ट्ठा किया और आधे घंटे में सब तय हो गया !
अब तो आएगा ना रूही कि शादी में ?
विपुल ने उधर से रुंधे गले से हाँ कहा !
समुद्र के किनारे कि रेत ज़यादा देर तक अपने उस आकार में नहीं रहती जो चले गए लोगो के पांव से बनते हैं बल्कि ज़यादा देर तक वो खुशबुएं चारो तरफ रहती हैं जो चले गए मुसाफिर अपने साथ लाये थे !
अथाह समुद्र से अधिक फैलाव हवा का है !
आनंद सिर्फ अंकित होने में नहीं , आनंद चिन्हित होने में भी है !!