" उजले पीले फूल खिले, मन मेरा , अब दर्पण सा,
स्नेह सुगंध की अन्जुलियाँ , नयनो की सब अर्पणता !
अपने संबंधों की सीमा , ज्यों नभ का विस्तार अनंत ,
रोज़ सहेज सी सांझ ढले , रोज़ - दिवस आता बसंत !! "
सरस्वती पूजा एवं बसंतपंचमी की शुभकामनाएं !!
* * * * * >> सुप्रभात << * * * * *