Saturday, January 28, 2012

" रोज़ सहेज सी सांझ ढले , रोज़ - दिवस आता बसंत !! "

" उजले पीले फूल खिले, मन मेरा , अब दर्पण सा,
  स्नेह सुगंध की अन्जुलियाँ , नयनो की सब अर्पणता !
  अपने संबंधों की सीमा , ज्यों नभ का विस्तार अनंत ,
  रोज़ सहेज सी सांझ ढले , रोज़ - दिवस आता बसंत !! "

    सरस्वती पूजा एवं बसंतपंचमी की शुभकामनाएं !!

         * * * * *  >> सुप्रभात << * * * * *

Wednesday, January 25, 2012

सुख और सुख की चाहत दुःख का मुख्य कारण बनती है !!

" सुख और सुख की चाहत दुःख का मुख्य कारण बनती है ....लेकिन ये भी सच है ...सुख की चाहत किये बिना जीवन नहीं आनंदमय लगता ! " अकारण और अनावश्यक आनंद एवं अनुभूत दुख में भेद कर पाना ही ....चलायमान जीवन की कुंजी , संभवतः है !! 

शुभ दिवस !! 

दिन की कठिनता , को विश्राम दें !!

" सर्द रातों मैं झरती हुई,   पंखुरी,
  डाली-डाली पवन हो रही,  बांसुरी !
 ओस  के सब दिए, आँखे मूंदे हुए,
 शब्द गढ़ते हुए, कर रहे आरती !!

 समय हैं , निशा है,  निशानों को जोड़ें,
 दिन की कठिनता ,  को विश्राम दें !!
 एकांकी नुक्कड़, सड़कें, गलियाँ वीरानी,
 हम भी अपनी आंखें मूंदें,  सो जाएँ !!

         *****  शुभरात्री *****

Tuesday, January 24, 2012

......... गुल्लक की टूटी हुई , पेंदियाँ !

" किताबों में मिलते गुलाब, अब कहाँ,
  गुल्लक की टूटी हुई ,  पेंदियाँ  !
  दीवारों पे लिखी हुई कुछ ग़ज़ल ,
  पन्नों मैं लिपटी हुई तितलियाँ !!

  बचपन को जल्दी भुलाने की ज़िद,
  अपने घरोंदों के होने की,  लौ !
  सभी कुछ मिले ,ये सोचा किये,
  फिसलता गया सब, ज्यों मछलियाँ !! "

        >>>> शुभ दिन <<<<<

Monday, January 23, 2012

गुन-गुन करती रात के संग, धीरे धीरे सो जाएँ !!

चाँद की शीतल किरणों का , हौले हौले से आना,
रेल की पटरी का कम्पन , धीरे धीरे थम जाना !
पुल पे चलती सर्द हवाओं के संग उडती धुल नहीं,
हम भी भूले, तुम भी अपना खालीपन लौटा आना !!
दिन के सारे कारण , लंबित अंधियारों से बतियाएँ ,
यादों के कुछ ताप सहें,  उलझन मैं सब  आशाएं ,
गुन-गुन करती रात के संग, धीरे धीरे सो जाएँ !!

@ @ @ @ @ शुभरात्री @@@@@