Sunday, August 5, 2012

" ग्राहक राजा होता है ,और राजा मोलभाव नहीं करते !! "

               कल एक दुकान पर गया, मुंबई के अँधेरी स्टेशन के पूर्व तरफ  ....जहाँ लिखे एक सूचनापट को पढ़ कर अच्छा लगा साथ ही एसा भी लगा की अपनी बात कई तरह से कही जा सकती है ,सही है जो मूल भावनाओ को एकदम वैसे ही रख कर प्रभावी ढंग से कहा जा सकता है ! उदहारण के तौर पर ये ही जो ये थी !!

        " ग्राहक राजा होता है  ,और राजा मोलभाव नहीं करते !! "

      एक ही पंक्ति में सब को सन्देश ! बुरा लगने वाले वाक्य :

" आज नकद कल उधार "

या

" एक दाम की दूकान  "

या

 " उधार मांग कर शर्मिंदा ना करें !!"

         इसी तरह से रिश्ते होते हैं , आप के द्वारा दी जाने तवज्जो पर निर्भर !!

बस शब्दों का हेरफेर

है और भाव बदल जाते हैं जिनके साथ साथ रिश्तों की दिशा और दशा तथा उम्र बंध जाती है !

रिश्तों में वैसे तो वक़्त का अहम् रोल है , किन्तु समय और विषय के मेल के शब्दों का चयन   "वक़्त " को कम कर देता है तथा सामीप्य को जल्दी लाता है !!