उजाले और अँधेरे,
अनंत रास्तों पर,
समुद्र किनारे,
रेत घुले पानी में,
हौले हौले बतियाते हैं,
छण भर को ही !!
सब कुछ भूल कर,
जैसे मिलते हैं,
दोस्त और दुश्मन,
छणिक,
उजाले खोजते,
अंधेरों में,
मधुशाला के !
अक्सर तो नहीं,
लेकिन होता ये,
कभी कभार,
जुड़ने की कोशिशें,
खाई पटाने के प्रयास,
अपनत्व तलाशते मन,
दबडबी आँखें लिए ,
सो जाते हैं !!
रिश्तों की,
अप्रत्याशित चुभन भरे,
बिस्तर पर ,
शेष बची साँसों से ,
उम्मीदों और जीवन को
जोड़ कर दूरियां ,
कम करने की ,
कोशिश में !!
अथक , अनंत,
क्योकि,
साथ नहीं मिलता ,
और,
अकेले कुछ नहीं होता ,
ना हारना और ना जीतना !!