Saturday, February 9, 2013

.... पैंतीस हज़ार फिट उंचाई के साथी !!

              सिहरन वाली ठण्ड और हल्की- हल्की धुंध लिए बहती हवाओं में मेरी टैक्सी बढ़ी चली जा रही थी , दिल्ली के इंदिरा गाँधी अन्तर्राजिय विमान तल की ओर ....मुझे मुंबई के लिए उड़ना था अधिकारिक यात्रा पर !!
              रात के दो बजे से तयारी कर के लगभग 3.45 बजे निकले थे ! सुबह का समय हरे हरे पेड़ों के बीच खाली खाली रास्ता  ऍफ़ एम् रेडिओ पर पुराने गानों की सरगम और यदाकदा मिल जाने वाली  लाल बत्ती सब आनंदित कर रहा था ! धर्मपत्नी जी ने कुछ विशेष पकाया था नाश्ते में ...जोधपुरी प्याज़ के कचोरियाँ ...खाते हुए जा रहे थे ! मेरे अनुरोध पर कुछ बाँध कर रख दी थीं ...अपने मुंबई के साथियों को खिलाने के लिए !!

             यमुना के पुल पर कुछ विचित्र लगा , सुबह सुबह दिल्ली पुलिस जांच कर रही थी हर आने जाने वाली गाड़ियों की ....काश ये उस दिन भी किया गया होता .....खैर अब तो मुस्तैद रहे ...कम से कम उतना तो हो जितने की आशा है ....बहुत ज्यादा नहीं तो थोडा ही सही ....!!

           समय से पहुच गए विमानतल पर ! एक बड़ी ही मन लुभावन प्रक्रिया है वहां ...मुझे बहुत भाति है ....आइये समझते हैं ....
         आप की टिकट के साथ आपका एक सरकारी , या मान्यता प्राप्त पहचान पत्र होना ज़रूरी है ...तभी अन्दर दाखिला मिलेगा ...एसा ही बोर्डिंग पास लेने के लिए होता है ...बोर्डिंग पास मिल जाये तो बस अब सुरक्षा जांच करवा लीजिये , फिर अन्दर दाखिल हो कर महंगी से मार्किट का आनंद लीजिये !! खरीदारी तो वहां तभी संभव है जब संसाधन सिमित ना हों !!
        चाय गली  मोहल्ले  में  बिकने  वाले  कप  का  दाम  हद  से  हद  12 रूपए होता है अन्यथा अभी भी पश्चिम बंगाल में माटी के भाट में 2 से 3 रूपए में मिल जाते हैं  ! हमने एअरपोर्ट पर चाय का आनंद चाहा ....मात्र 90/- रूपए में ले सके !! एक समोसा 50 रूपए में मिला !! इसे आनंद ही के सकूंगा में तो ! कितने आनंदित हो कर हम चाय का मजा लेते हैं जो इस दाम की हो तो ...पता नहीं क्या कास्टिंग की पद्यति अपनाते हैं .... योजना आयोग 30 से 40 रूपए में एक आदमी का सारा दिन का भोजन कैलकुलेट कर लेता है और यहाँ एक चाय 90 रूपए की है ....कमाल के बात है की दोनों ही भारत मैं हैं ! वो बात और है की तर्क आ सकता है की जब हवा में उड़ने का शौक है तो ये नखरे तो उठाने ही पड़ेंगे !!
        हम धीरे धीरे कर के अपने विमान के और चल दिए ! एक बस के द्वारा वहां पहुचाया गया हमको ! खिड़की के साथ की सीट थी हमारी ! अब हलक हलक अँधेरा छटने लगा था !

                                              सारी तयारी होने के बाद हम उड़े !

         धीरे-धीरे अन्दर की बत्तियां बंद हो गयीं ! बीच के तो तरफ फ्लोरोसेंट पट्टी जल उठीं ! थोड़ी देर में पानी , बिस्किट , चाय और गाने सुनने के लिए माइक्रो फ़ोन दिए गए ! दो तीन परिचारिकाएँ, दो तीन परिचारक आगे से पीछे आना जाना लगा रहे थे ! कभी किसी को अपने रखे सामान में से कुछ चाहिए
होता , तो कभी किसी को पानी की दरकार !! कभी कोई ये शिकायत करता की उसके ऊपर वाले फेन के पॉइंट से हवा नहीं आ रही तो , किसी को ये शिकायत की कुर्सी की बेल्ट ज़रा छोटी पड़ गयी है उसकी कमर के मुकाबले !!
          अब बाहर का नज़ारा बड़ा मनोरम हो गया था !! एसा लगता था मानो हम सब इंद्र देवता के बुलावे पर उनके राज्य में आ गए हों और चारो और सफ़ेद बादलों की कालीन बिछी हुई थी ! सूरज की नई नवेली किरणे एक तरफ से होते हुए विमान के दुसरे तरफ की और निकल रहीं थी .....!! सुनहरे किरणे ..ऐसा रंग जैसा की दक्षिण के सोने का होता है ....लाली लिए हुए ....और अजब वो पड़ता था सफ़ेद बादलों पर तो लगता था जैसे की हलके सुनहरे रंग का सिंहासन रख दिया हो ....जैसा की कश्मीर के राजा गुलाब सिंह जी का है ...आज भी रखा है ....जम्मू में उस किले में जो अब संग्रहालय में तब्दील हो गया है !!

          अब तक सब ठीक था ...अचानक उद्घोषणा हुई की " मौसम खराब होने के कारण सभी यात्रियों को कहा जाता है की वो अपनी सुरकचा पेटी बाँध लें और जो अपनी सीट पर नहीं हैं ...वो वापस लौट जाये ...ये तयारी इमर्जन्सि लैंडिंग के लिए है ...."  बस इतना सुनना था की सब के चेहरो पर हवाइयां उड़ने लगी ....चिंता , फ़िक्र , शिकन छा  गयी और आनंद काफूर ....!!

        सब याद आने लगे ....

घर के सब लोग !
याद करते सब लोग !
हाथ हिल कर विदा करते सब लोग !
सलामती की दुआ मांगते सब लोग ....!

इतना सब हो रहा था फिर भी उन 6 लोगे के चहरे पर ज़रा सी भी शिकन नहीं थी !!

                कुछ नहीं है सर ...बस थोड़ी देर में सब मौसम ठीक हो जाएगा और हम जल्दी ही मुंबई एअरपोर्ट पर उतर जाएँगे , एसा कहते हुए वो भी अपनी निर्धारित सीटों पर बैठ गए !!

               हलके भारी झटके लेते हुए विमान ने जयपुर के ऊपर से उड़ान भरी !! पायलट ने बताया ..अब मौसम सामान्य है आप अपनी सुरक्षा पेटियां खोल सकते हैं ....!!

               1.55 मिनट की यात्रा ...जिसमे 3 घंटे पहले की तयारी और बाद का 1 घंटे का सफ़र ....कर के मुंबई पहुच गए ...! ऊपर  मोबाईल भी  नहीं करता है ,ये जैसा की सब को पता है ! पूरी दुनिया के बीच में रहते हुए भी ...दुनिया से दूर हो जाते हैं हम सब और एसे संकट का में साथी होते हैं तो वो  पल वो लोग जिनको आप जानते भी नहीं कभी पहले मिले नहीं ...मिलने की कोई आशा भी नहीं !! हौसला वो लोग बढ़ाते हैं जो आप के साथ होते हुए भी आप जैसे नहीं हैं किन्तु आप को आप ही रहने देने में सहायक बनते हैं !!

                 हर एक बगल में बैठा व्यक्ति अपने को कुछ ख़ास समझता है और बगल वाले को मजबूरन अपने समीप स्वीकार करता है ....किन्तु असहाय समय में वो सभी लोग एक दुसरे के सामान्य सहायक बन जाते हैं ....35 हज़ार उंचाई पर ....साथी की तरह !!


एक तस्वीर ,,,,,इसी यात्रा से सम्बंधित .....अवलोकन करें !!

Monday, February 4, 2013

........ आ जाना तुम माझीं बन !! .....7 अक्टूबर 1991 को लिखा एक गीत ... संकलित !!


.....7 अक्टूबर 1991 को लिखा एक गीत ... संकलित !!

***** आ जाना तुम माझीं बन *****

 यादों की नदियों के तट पर,
     जब-जब दुःख की लहरें हों !
             मुझको साथी पार लगाने,
                   आ जाना तुम माझीं बन !!

<>*<>*<>पहला अंतरा <>*<>*<>

जिनमे ह्रदय की सब कलियाँ ,
कुछ खुशियाँ बनकर खिल जाएँ !
उन खुशियों संग कुछ आंसूं भी ,
जब पलकों पर ठहरे हों ;
उनको साथी पार लगाने ,
आ जाना तुम माझी बन !!

<>*<>*<> दूसरा अंतरा <>*<>*<>

अन्जान दुखों का अँधेरा ,
जब बादल बनकर छा जाये !
दूर किनारे रहूँ अकेला ,
बींच भंवर के पहरे हो ;
मुझको साथी पार लगाने ,
आ जाना तुम माझी बन !!

<>*<>*<> तीसरा अंतरा <>*<>*<>

दूर हों मंजिल और अकेला ,
चलता-चलता थक जाऊं !
जीवन के इस लम्बे पथ पर,
चिन्ह न पिछले  गहरे  हों ;
मुझको साथी पार लगाने ,
आ जाना तुम माझी बन !!

                <>*<>*<>

यादों की नदियों के तट पर,
    जब-जब दुःख की लहरें हों !
        मुझको साथी पार लगाने,
           आ जाना तुम माझी बन !!

                        ::::::::: मनीष कुमार सिंह :::::: on dated 07-10-1991 originally  written ..



Sunday, February 3, 2013

..... जब हस्ताक्षर बनते हैं !!

                                              " " ......जब हस्ताक्षर  बनते हैं !! " "

              हम सब आज किसी न भाषा में अपने होने का प्रमाण " हस्ताक्षर " के रूप में देते हैं !
कालेज में होने वाली किसी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए भरे गए फॉर्म की बात हो ये फिर संयोग से मिले किसी वजीफे ( स्कोलरशिप  ) के चेक को भुनाने की लिए खोले गए पहले बचत खाते की बात !!
            संभवतः हर इंसान के जीवन में एक ऐसा वक़्त होता है जब वो किसी न किसी अपने आसपास के व्यक्ति से प्रभावित होते हैं ....:

1. उसके पहनावों से,
2. उसके बोलने से तरीके से ,
3. उसके चलने के तरीके से,
4. उसके हस्ताक्षर से .....

        आठवीं क्लास से ही हम कोशिश करने लगते हैं हस्ताक्षर करने की ... अपनी पहचान बताने की दुनिया को ...अपने न केवल अपने कार्यो से बल्कि अपने हस्ताक्षर से हमेशा के लिए स्थापित हो जाने की कोशिश करने लगते हैं ...ये समझते हुए की हम अपने नाम के प्रथम अक्षर से शुरू कर के रेखाओं को विभिन्न प्रकार से घूमाते हुए अंत में कभी कभी एक , दो ये फिर अनेक बिन्द्दियों से खतम कर के एक ये दो छोटी रेखाएं बना का ख़तम कर देना और बस हो गए हस्ताक्षर !!

          बड़े बड़े पदों पर आसीन लोगो के हस्ताक्षर , बड़े बड़े स्थापित लोगो के हस्ताक्षर .. जैसे वैज्ञानिक , खोजकर्ता , राजनेता , अभिनेता  इत्यादि ....!

          कितने ही लोग हैं की हस्ताक्षर के करने के तरीके से पता कर लेते हैं की : -

         हस्तक्षर करने वाला क्या है ? कहाँ तक आगे जाएगा ? किस छेत्र से है ? उसके जीवन में किस तरह के उतार चढ़ाव आयेंगे  या  आ चुके हैं ? मुझे ये नहीं समझ आता की जब हस्ताक्षर हम सवयं ही अपने हस्ताक्षर बनाते हैं तो क्या हम भविष्य ...जी हाँ हम अपना भविष्य बना  सकते हैं क्या , अपने हस्ताक्षर के माध्यम से ?

          दसवीं , बारहवीं, स्नातक और आगे की पढ़ाई के हर फॉर्म पर किये जाने वाले आपके हस्ताक्षर हर बार पिछले किये गए से ज्यादा बेहतर और परिष्कृत होते जाते हैं ....जसे जसे आप का ज्ञान और संपर्कों की परिधि बढ़ती जाती है तो भविष्य का व्यास पुनर्परिभाषित होता जाता है ....हस्ताक्षरों के माध्यम से ....और हम बड़े होते जाते हैं , जिम्मेदार और अपने आस पास की जुड़ती नई पीढ़ियों के लिए एक बार पुनः आदर्श के रूप में बनती हुई !!

                         धीरे धीरे ....हम बड़े हो रहे होते हैं ....जब हस्ताक्षर बनते हैं !!