सिहरन वाली ठण्ड और हल्की- हल्की धुंध लिए बहती हवाओं में मेरी टैक्सी बढ़ी चली जा रही थी , दिल्ली के इंदिरा गाँधी अन्तर्राजिय विमान तल की ओर ....मुझे मुंबई के लिए उड़ना था अधिकारिक यात्रा पर !!
रात के दो बजे से तयारी कर के लगभग 3.45 बजे निकले थे ! सुबह का समय हरे हरे पेड़ों के बीच खाली खाली रास्ता ऍफ़ एम् रेडिओ पर पुराने गानों की सरगम और यदाकदा मिल जाने वाली लाल बत्ती सब आनंदित कर रहा था ! धर्मपत्नी जी ने कुछ विशेष पकाया था नाश्ते में ...जोधपुरी प्याज़ के कचोरियाँ ...खाते हुए जा रहे थे ! मेरे अनुरोध पर कुछ बाँध कर रख दी थीं ...अपने मुंबई के साथियों को खिलाने के लिए !!
यमुना के पुल पर कुछ विचित्र लगा , सुबह सुबह दिल्ली पुलिस जांच कर रही थी हर आने जाने वाली गाड़ियों की ....काश ये उस दिन भी किया गया होता .....खैर अब तो मुस्तैद रहे ...कम से कम उतना तो हो जितने की आशा है ....बहुत ज्यादा नहीं तो थोडा ही सही ....!!
समय से पहुच गए विमानतल पर ! एक बड़ी ही मन लुभावन प्रक्रिया है वहां ...मुझे बहुत भाति है ....आइये समझते हैं ....
आप की टिकट के साथ आपका एक सरकारी , या मान्यता प्राप्त पहचान पत्र होना ज़रूरी है ...तभी अन्दर दाखिला मिलेगा ...एसा ही बोर्डिंग पास लेने के लिए होता है ...बोर्डिंग पास मिल जाये तो बस अब सुरक्षा जांच करवा लीजिये , फिर अन्दर दाखिल हो कर महंगी से मार्किट का आनंद लीजिये !! खरीदारी तो वहां तभी संभव है जब संसाधन सिमित ना हों !!
चाय गली मोहल्ले में बिकने वाले कप का दाम हद से हद 12 रूपए होता है अन्यथा अभी भी पश्चिम बंगाल में माटी के भाट में 2 से 3 रूपए में मिल जाते हैं ! हमने एअरपोर्ट पर चाय का आनंद चाहा ....मात्र 90/- रूपए में ले सके !! एक समोसा 50 रूपए में मिला !! इसे आनंद ही के सकूंगा में तो ! कितने आनंदित हो कर हम चाय का मजा लेते हैं जो इस दाम की हो तो ...पता नहीं क्या कास्टिंग की पद्यति अपनाते हैं .... योजना आयोग 30 से 40 रूपए में एक आदमी का सारा दिन का भोजन कैलकुलेट कर लेता है और यहाँ एक चाय 90 रूपए की है ....कमाल के बात है की दोनों ही भारत मैं हैं ! वो बात और है की तर्क आ सकता है की जब हवा में उड़ने का शौक है तो ये नखरे तो उठाने ही पड़ेंगे !!
हम धीरे धीरे कर के अपने विमान के और चल दिए ! एक बस के द्वारा वहां पहुचाया गया हमको ! खिड़की के साथ की सीट थी हमारी ! अब हलक हलक अँधेरा छटने लगा था !
सारी तयारी होने के बाद हम उड़े !
सारी तयारी होने के बाद हम उड़े !
धीरे-धीरे अन्दर की बत्तियां बंद हो गयीं ! बीच के तो तरफ फ्लोरोसेंट पट्टी जल उठीं ! थोड़ी देर में पानी , बिस्किट , चाय और गाने सुनने के लिए माइक्रो फ़ोन दिए गए ! दो तीन परिचारिकाएँ, दो तीन परिचारक आगे से पीछे आना जाना लगा रहे थे ! कभी किसी को अपने रखे सामान में से कुछ चाहिए
होता , तो कभी किसी को पानी की दरकार !! कभी कोई ये शिकायत करता की उसके ऊपर वाले फेन के पॉइंट से हवा नहीं आ रही तो , किसी को ये शिकायत की कुर्सी की बेल्ट ज़रा छोटी पड़ गयी है उसकी कमर के मुकाबले !!
अब बाहर का नज़ारा बड़ा मनोरम हो गया था !! एसा लगता था मानो हम सब इंद्र देवता के बुलावे पर उनके राज्य में आ गए हों और चारो और सफ़ेद बादलों की कालीन बिछी हुई थी ! सूरज की नई नवेली किरणे एक तरफ से होते हुए विमान के दुसरे तरफ की और निकल रहीं थी .....!! सुनहरे किरणे ..ऐसा रंग जैसा की दक्षिण के सोने का होता है ....लाली लिए हुए ....और अजब वो पड़ता था सफ़ेद बादलों पर तो लगता था जैसे की हलके सुनहरे रंग का सिंहासन रख दिया हो ....जैसा की कश्मीर के राजा गुलाब सिंह जी का है ...आज भी रखा है ....जम्मू में उस किले में जो अब संग्रहालय में तब्दील हो गया है !!
अब तक सब ठीक था ...अचानक उद्घोषणा हुई की " मौसम खराब होने के कारण सभी यात्रियों को कहा जाता है की वो अपनी सुरकचा पेटी बाँध लें और जो अपनी सीट पर नहीं हैं ...वो वापस लौट जाये ...ये तयारी इमर्जन्सि लैंडिंग के लिए है ...." बस इतना सुनना था की सब के चेहरो पर हवाइयां उड़ने लगी ....चिंता , फ़िक्र , शिकन छा गयी और आनंद काफूर ....!!
सब याद आने लगे ....
घर के सब लोग !
याद करते सब लोग !
हाथ हिल कर विदा करते सब लोग !
सलामती की दुआ मांगते सब लोग ....!
इतना सब हो रहा था फिर भी उन 6 लोगे के चहरे पर ज़रा सी भी शिकन नहीं थी !!
कुछ नहीं है सर ...बस थोड़ी देर में सब मौसम ठीक हो जाएगा और हम जल्दी ही मुंबई एअरपोर्ट पर उतर जाएँगे , एसा कहते हुए वो भी अपनी निर्धारित सीटों पर बैठ गए !!
हलके भारी झटके लेते हुए विमान ने जयपुर के ऊपर से उड़ान भरी !! पायलट ने बताया ..अब मौसम सामान्य है आप अपनी सुरक्षा पेटियां खोल सकते हैं ....!!
1.55 मिनट की यात्रा ...जिसमे 3 घंटे पहले की तयारी और बाद का 1 घंटे का सफ़र ....कर के मुंबई पहुच गए ...! ऊपर मोबाईल भी नहीं करता है ,ये जैसा की सब को पता है ! पूरी दुनिया के बीच में रहते हुए भी ...दुनिया से दूर हो जाते हैं हम सब और एसे संकट का में साथी होते हैं तो वो पल वो लोग जिनको आप जानते भी नहीं कभी पहले मिले नहीं ...मिलने की कोई आशा भी नहीं !! हौसला वो लोग बढ़ाते हैं जो आप के साथ होते हुए भी आप जैसे नहीं हैं किन्तु आप को आप ही रहने देने में सहायक बनते हैं !!
हर एक बगल में बैठा व्यक्ति अपने को कुछ ख़ास समझता है और बगल वाले को मजबूरन अपने समीप स्वीकार करता है ....किन्तु असहाय समय में वो सभी लोग एक दुसरे के सामान्य सहायक बन जाते हैं ....35 हज़ार उंचाई पर ....साथी की तरह !!
एक तस्वीर ,,,,,इसी यात्रा से सम्बंधित .....अवलोकन करें !!