Wednesday, January 25, 2012

दिन की कठिनता , को विश्राम दें !!

" सर्द रातों मैं झरती हुई,   पंखुरी,
  डाली-डाली पवन हो रही,  बांसुरी !
 ओस  के सब दिए, आँखे मूंदे हुए,
 शब्द गढ़ते हुए, कर रहे आरती !!

 समय हैं , निशा है,  निशानों को जोड़ें,
 दिन की कठिनता ,  को विश्राम दें !!
 एकांकी नुक्कड़, सड़कें, गलियाँ वीरानी,
 हम भी अपनी आंखें मूंदें,  सो जाएँ !!

         *****  शुभरात्री *****

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