Friday, January 18, 2013

~~~ भीगा-भीगा सा चाँद, कल रात सोया नहीं !!

                      **** भीगा - भीगा सा चाँद , कल रात सोया नहीं !! ****

              रूई से भी ज्यादा कोमल रेशों की तकिया बनवाई थी उसके पापा ने उसके लिए जब वो छोटा था ! पूरी पूरी रात कभी कभी तो अगले दिन भी वो अपने दफ्तर नहीं जाते थे ...इस लिए की वो अपने पापा की गोद में सोता रहता था ...और वो जाग ना  इस लिए वो अपने हाथों से उसको उतारते नहीं थे , और वो सोता रहता था !   आज उसके पापा उसके साथ नहीं हैं !! वो कोमल सा तकिया भी ना जाने किस के पास है ...उसके पास नहीं है !! वो दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह " पापा की गोद " भी उसके पास नहीं है ! आज वो देखता है बस और मन की समझा कर रह जाता है की ...कोई नहीं है सब था अब नहीं है !!
               कल रात बहुत ज़ोरों की बारिश आई और लगता था की ओले भी पड़ रहे थे ...उसको अपने बचपन की ऐसी  ही रात याद हो आई ...जब जोर से बारिश आई थी और उसके पापा ने उसको अपने सीने से लगा लिया था ...सारा डर , दिसंबर की सुर्ख सर्दी और कपकपाहट सब पापा ने ले लिया था और वो सुकून से सोया था !

                अगले ही दिन उसके पापा कहीं गए और फिर कभी नहीं लौटे !! उसकी गीली आँखे आज भी उस रात की ही तरह भयभीत है ...लेकिन उस दिन  तरह आज उसके पापा नहीं हैं उसके पास जो सब अपने में समां लेते ....!! कल रात भी बारिश हुई और सब कुछ वैसा ही हुआ ...बस पापा की गोद और उनके सीने से मिलते सुकून के सिवा !!

                रात भर बारिश होती रही और रह रह कर पापा के ना होने का खालीपन उसको खाता रहा !! ये भी एहसास करता था ...आज , कल और आने वाले कल में फर्क होता है ....!
               अपने सभी भाई बहनों में वो एक चाँद है ... और आज की रात ये भीगा भीगा सा चाँद सोया नहीं ....पूरी रात बारिश भिगोती रही और अपने खालीपन और आंसुओं से चाँद खुद भीगता रहा ...बिना किसी से कुछ कहे ...और जागता रहा ....चाँद सोया नहीं ....चाँद अकेले ही रहते हैं ...हमेशा भीगते हुए ...बारिश से आंसुओं की अकेले-अकेले !!