Thursday, May 3, 2012

आँगन आँगन हां हां ही ही !

आँगन आँगन हां हां ही ही ,
गलियों गलियों बात चली !
आँख चढ़ाए सूरज आया ,
कलियाँ सारी खिली खिली !!
रात के सारे सुस्त खिलोने ,
फुदक फुदक कुछ गाते हैं !
हौले हौले ख़ामोशी अब ,
किरणों के संग चली चली !!
   ***** सुप्रभातम *****