बुलबुले ,
संवेदनाहीन होते हैं !
फूट जाते हैं !
समर्पण पर भी,
नमन पर भी,
आचमन पर भी,
संजोने में भी,
बिखेरने में भी,
समेटने में भी !
बुलबुले,
तलाशते हम,
सिमट जाते हैं,
रेत में,
सूखते पानी कि तरह,
आशाओं का !
बुलबुले,
संवेदनाहीन होते हैं !
फूट जाते हैं !
## मनीष सिंह ##
संवेदनाहीन होते हैं !
फूट जाते हैं !
समर्पण पर भी,
नमन पर भी,
आचमन पर भी,
संजोने में भी,
बिखेरने में भी,
समेटने में भी !
बुलबुले,
तलाशते हम,
सिमट जाते हैं,
रेत में,
सूखते पानी कि तरह,
आशाओं का !
बुलबुले,
संवेदनाहीन होते हैं !
फूट जाते हैं !
## मनीष सिंह ##