Wednesday, September 18, 2013

हाथ खाली हैं !!

हाथ खाली हैं !

चन्दन मिट गया,
अक्षत बिखर गए ,
दूब सूख गयी,
धूप धुआँ हुई,
फूल मुरझा गए,
आहूति के शब्द ,
अब नहीं गूंजते, 
 हवन कुंड की ,
अग्नि शांत है !

आस में,
अपेक्षित है,
अनंत समृधि, 
असीम वस्तुएँ ,
भविष्य के लिए !

किन्तु , 
आज की सत्यता,
स्वीकृत हो,
की , हाथ खाली हैं !  

भविष्य ,
कौन देखता है ,
ये सब ,
कौन भोगेगा !
आज दिखता है,
की हाथ , खाली हैं !