हाथ खाली हैं !
चन्दन मिट गया,
अक्षत बिखर गए ,
दूब सूख गयी,
धूप धुआँ हुई,
फूल मुरझा गए,
आहूति के शब्द ,
अब नहीं गूंजते,
हवन कुंड की ,
अग्नि शांत है !
आस में,
अपेक्षित है,
अनंत समृधि,
असीम वस्तुएँ ,
भविष्य के लिए !
किन्तु ,
आज की सत्यता,
स्वीकृत हो,
की , हाथ खाली हैं !
भविष्य ,
कौन देखता है ,
ये सब ,
कौन भोगेगा !
आज दिखता है,
की हाथ , खाली हैं !