चाँद की शीतल किरणों का , हौले हौले से आना,
रेल की पटरी का कम्पन , धीरे धीरे थम जाना !
पुल पे चलती सर्द हवाओं के संग उडती धुल नहीं,
हम भी भूले, तुम भी अपना खालीपन लौटा आना !!
दिन के सारे कारण , लंबित अंधियारों से बतियाएँ ,
यादों के कुछ ताप सहें, उलझन मैं सब आशाएं ,
गुन-गुन करती रात के संग, धीरे धीरे सो जाएँ !!
@ @ @ @ @ शुभरात्री @@@@@
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