" कांच के टूटे छल्लों जैसी ,
मेरी - तेरी यादें और दिन !
गुल्लक से भी कीमत वाले,
तुझ संग बीते , वो पलछिन !!
युगों- युगों की प्यास बुझाते,
मन शब्दों के सुलझे बोल ,
मर्यादित से, स्पर्श आलिंगन,
अनजाने अवरोधों के बिन !! "
गुल्लक से भी कीमत वाले,
तुझ संग बीते ,वो पलछिन !!
मेरी - तेरी यादें और दिन !
गुल्लक से भी कीमत वाले,
तुझ संग बीते , वो पलछिन !!
युगों- युगों की प्यास बुझाते,
मन शब्दों के सुलझे बोल ,
मर्यादित से, स्पर्श आलिंगन,
अनजाने अवरोधों के बिन !! "
गुल्लक से भी कीमत वाले,
तुझ संग बीते ,वो पलछिन !!