Monday, July 25, 2011

" अख़बारों की स्याही ने भी धुंधला आँचल ओढ़ लिया "

" अख़बारों की स्याही ने भी धुंधला आँचल ओढ़ लिया ,
        सूरज ने भी अपनी किरणों की बांहों को सिकोड़ लिया !
                 हम तुम भी अब घर की राह पर धीरे धीरे बढ़ जाएँ ,
                         किरने सोयीं , पंछी सोये , सुख सपनों मैं खो जाएँ !!
                                                  ----------------------- धीरे धीरे सो जाएँ !!
                                                                                                  -- :             मनीष

Sunday, July 24, 2011

समय के साथ चलिए ... पकड़ने की कोशिश हमेशा आपको पीछे रखेगी !

" अनुभव " कितना सहज शब्द है ना ? जी हाँ , किन्तु आता ये अपने पास बहुत असहजता से...! अब देखिये ना कल तक आपके अपने संपर्को के लिए आपने कितने शब्द चुन रखे थे और आज कुछ के मने बदल गए ...ये हमें खुद बदलने पड़े ! कुछ सुखद हो गए ...कुछ दूरी बना गए ....! जो भी हो ...आपका अनुभव आपके साथ साथ औरों के लिए भी सहाय होता है ...जीवन को सहजता से लेने और जीने के लिए !!

नीम और शहतूत का स्वाद ...सिर्फ नाम भर लेने से आपकी जुबां पर आ जाता है...  ऐसे ही कुछ रिश्ते अपना स्वाद इस तरह से छोड़ जाते हैं की उन लोगो का नाम भर लेने से आपके  पुरे जीवन मैं एक अनुभव अपना वजूद सामने ले आता है ....कई बार शेह्तूत की तरह और कभी नीम की तरह .... !!

समय के साथ चलिए ... पकड़ने की कोशिश हमेशा आपको पीछे रखेगी ... जो जाता है जाने दो ..आने वाले का स्वागत करिए ... अगर साथ नहीं चल सकते तो !!