Thursday, June 6, 2013

एक कहानी : वेटिंगरूम के हमसफ़र !

             कुंदन उसको स्टेशन पर छोड़ कर अपने ऑफिस जा चुका था ! नाईट शिफ्ट जो थी उसकी ! लखनऊ हो कर दिल्ली जाने वाली ट्रेन आज काफी लेट थी ! वाणी और कुंदन के सोचा था की २ घंटे की तो बात है , ऐ सी वेटिंग रूम में निकल जाएँगे ! वाणी सीढ़ियों से होते हुए प्लेटफोर्म नंबर एक पर बने ऐ सी वेटिंग रूम में दाखिल हुई ! गेट पर बैठी एक नीली सी साड़ी में महिला ने वाणी को अपनी पहचान और अपनी करंट टिकेट डिटेल वहां रखे रजिस्टर में भरने को कहा !

वाणी : ये कब से शुरू हो गया ?

महिला कर्मचारी : मेडम जी ये सिस्टम तो शुरू से है !

वाणी : ओह्ह हाँ मैं ही पहली बार किसी स्टेशन के वेटिंग रूम ने रुक रही हूँ ना इस लिए ऐसा पूछ लिया !

महिला कर्मचारी : जी कोई बात नहीं ! आप ये सब कालम भर दीजिये !

वाणी: हाँ ज़रूर , लाइए !

वाणी ने सब कुछ लिख कर अपने छोटे सिग्नेचर किये !

महिला कर्मचारी ने रजिस्टर अपनी तरफ घुमाते हुए हलके से कहा : दिल्ली जा रही हैं ?

वाणी अपने एअर बैग को सरकाते हुए मुस्कुराते हुए बोली : जी हैं , माँ के पास !

महिला कर्मचारी : अच्छी बात, माँ से तो मिलना ही चाहिए !

           वाणी ने कुछ नहीं बोल कर उनकी हाँ में हाँ मिलाई और वेटिंग रूम में बैठने के लिए जगह देखने लगी ! वैसे तो पूरा वेटिंग रूम जनरल वेटिंग रूम की तुलना में खाली खाली था , फिर भी बैठने के लिए एकांत चाहिए था इसलिए उसने महिला कर्मचारी से कुछ दूरी पर ही खाली पड़े तीन कुर्सियों के सेट पर अपना एयर बैग और लैपटॉप बैग रखा और खुद बैठ गयी ! क्योकि वो सीट दरवाज़े के पास थी इसलिए अन्दर का हर कोना वहाँ से दिखाई दे रहा था !
          
           वाणी ने अपने हैण्ड बैग से दो दिन पहले ही कुंदन का गिफ्ट किया हुआ सफ़ेद रंग का एप्पल iPod निकला और पुराने गानों का फोल्डर सर्च करने लगी !

            तभी रेलवे की एनाउंसमेंट होने लगी : यात्रीगण कृपया ध्यान दें , हावड़ा से चलकर लखनऊ होते हुए नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन  ४ घंटे देरी से आने की सब्भावना है ! यात्रियों को हुई असुविधा के लिए हमें खेद है ! रात के सवा ग्यारह बज रहे थे ! चार घंटे लेट यानि सुबह के तीन बजे लगभग ! वाणी ने गहरी सांस ली ! iPhone  पर लता मंगेशकर का एक पुराना गाना चलने लगा था ! अब तो अगले ४ घंटो तक वो वेटिंग रूम ही साथी था ! वाणी ने एक सरसरी निगाह पुरे वेटिंग रूम के हर कोने पर डाली ! कोई ६ सात लोग ही थे !
            थोड़ी देर पहले सब अपने अपने में व्यस्त लेकिन जैसे ही एनाउंसमेंट हुई सब ने एक दुसरे को बड़ी ही अतामियता से देखा !
             जैसे कह रहे हों कोई बात नहीं हम आप के साथ साथ हैं ! एक दुसरे से बिना शब्दों के ही बात कर ली ! दो अधेड़ उम्र के शख्स साथी बन गए और अपना सामान वहीँ रख कर चाय पान करने को चल दिए ! दो लोग जो चालीस के नीचे रहे होंगे भी बाते करने लगे : आयिए सर बहार लहेल आते हैं , नींद तो कहाँ आयगी अभी ! चलिए कह कर वो लोग भी वेटिंग रूम के बहार चल दिए और महिला कर्मचारी से इशारों में अपने सामान की देख भला के लिए कह दिया !
   अब वेटिंग रूम में  यात्रियों के नाम पर बस वाणी एक संत जो चुपचाप अपनी सीट पर सो रहे थे और एक सोलह सत्रह साल का लड़का रह गए थे !   
        अगले दस मिनट तक किसी ने किसी जो नहीं देखा ! थोड़ी देर के बाद वाणी ने समझा की वो लड़का कुछ देर से वाणी को देख रहा है , जैसे कुछ पूछना चाहता हो !

तभी तेज़ बारिश शुरू हो गयी !

    महिला कर्मचारी बडबड करने लगी : बस इसकी ही  कमी थी ! इतनी ठंडक वैसे ही है ऊपर से यस बारिश ! भगवान् भी नहीं सोचते की कितने परेशान होते होंगे वो लोग जिनको गरमा कपडे नहीं है !  

              वाणी और उस लड़के का ध्यान उधर गया ! वाणी ने अपने कान से इयरफोन निकाल दिया और बारिश की आवाज़ सुनने लगी ! सुनसान प्लेटफार्म ! बहुत कम लोग ! वज़न तोलने वाली मशीन के भीतर जलते बुझते बल्बों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी , जो वेटिंग रूम के पास ही लगा था !  अपनी टोकरी में कुछ जामुन रखे जल्दी जल्दी अपने घर लौट रहा था ! दिन के समय कंधे से कंधे टकराने वाली भीड़ और इस समय एक भयावह सन्नाटा पसरा पड़ा था प्लेटफोर्म पर !  दूर तक इक्का दुक्का आदमी किसी कोने की तलाश में भटकते दीख पड़ते थे ! प्लेटफार्म की केन्टीन भी वेटिंग रूम से कुछ दूरी पर थी! दिन का समय होता तो कोई बात नहीं लेकिन रात के बारह बजे वाणी को चाय की ज़रुरत के बावजूद वो कंटीन बहुत दूर लग रही थी !

हिम्मत नहीं पड़ी की बाहर निकले !  दूर बैठा वो लड़का शायद ये भांप गया ! उसने अपना लेपटोप का बैग उठाया और वेटिंग रूम के दरवाज़े के पास आ कर खड़ा हो गया ! ठंडी हवा थी ! सिर्फ एक टी शर्ट और जींस में था वो !

महिला कर्मचारी ने लगभग डांटते हुए कहा :  स्वेटर नहीं है आपके पास ?
लड़का : जी अपने मुझ से कुछ कहा ?

महिला : हाँ जी , स्वेटर नहीं है आपके पास ?

लड़का : है तो !

महिला : पेहेन क्यों नहीं लेते ?

लड़का : हाँ शायद पहनना ही पड़ेगा !

महिला : पड़ेगा ? पेहेनिये अभी ! ठण्ड लग गई ना तो आपको कुछ नहीं आपके माता पिता को मुश्किल होगी !

लड़का गंभीर हो गया ! वाणी के एयरबैग पर अपना पिट्ठू बैग रख कर उसने स्वेटर निकल कर पहना!
महिला मुस्कुराई और बोली : चाय पीने जा रहे हो ?

लड़का : जी हाँ :

महिला : ठीक है जाओ , बैग चाहो तो  रख दो , मैं हूँ यहाँ रात भर !

लडके ने अपना बैग वाणी के एयरबैग के बगल में रख कर बाहर की तरफ चल दिया !

वाणी ये सब देख और सुन रही थी ! लड़के को पीछे से बुलाने के लिए उसने महिला को इशारा
किया ! महिला ने लड़के को कहाँ वो बुला रही है तुमको ! जैसे इसी समय का इंतज़ार था !
लड़के ने मुड कर वाणी को देखा और बोल : जी कहिये ?

वाणी : एक चाय मेरे लिए भी लेते आयेंगे प्लीज़ ?

लड़का : अरे उसमे क्या है , बिलकुल !
वाणी में अपने पर्स में से पचास रुपए का नोट निकला और छोटा थरमस आगे बढ़ाते हुए लड़के को थैंक्स कहा !
लड़का थोड़ी देर में चाय और मीठे बिस्किट के पेकेट ले आया  ! तीन प्लास्टिक के गिलास भी  लाया था !

लीजिये : लड़का वाणी से बोला !

वाणी : ये सब  क्या ?

लड़का : अब रात के साढ़े बारह बज रहे हैं और चाय के साथ समोसे तो मिले नहीं इस लिए बिस्किट ले आया ! और हाँ आपका पचास का नोट लिया नहीं उसने , ये लीजिये !

वाणी : अरे क्या ये नकली है , क्यों नहीं लिया ?

लड़का : खुले नहीं थे भाई उसके पास !

वाणी , लड़का और महिला सब हलके से मुस्कुराये ! माहौल में हलकी गर्माहट आ गयी थी !
लड़के ने एक एक कर के थरमस से चाय महिला , वाणी और खुद ली ! सब तेज़ बरसते पानी में झूमती हवा की ठंडक के बीच रात के बारह के बाद रेलवे प्लैटफार्म पर चाय और बिस्किट का आनंद ले रहे थे ! कोई किसी को नहीं जनता ! लेकिन केवल तीन घंटो में एक रिश्ता बन गया था ! जिसकी कोई परिभाषा नहीं !

लड़का : आपका iPhone  बहुत सुन्दर है !

वाणी : हाँ मेरे हसबेंड ने दो दिन पहले ही गिफ्ट किया है मुझे हमारी फर्स्ट वेडिंग एनिवेर्सेरी पर !
वाणी बोलती रही : अच्छा तुम्हारा नाम क्या है ?


लड़का : जी , अविरल , आप मुझे अवि कहे सकती हैं ! आपका नाम ?

वाणी : मेरा नाम वाणी है , अब तो श्रीमती वाणी हो गयी हूँ !

अवि : हल्का सा मुस्कुराया !

अविरल और वाणी के बीच ५ सालों के उम्र का फर्क होगा !

वाणी : क्या करते हो अवि ?

अवि : फिलहाल तो घूम फिर रहा हूँ ! कभी किसी रिश्तेदार के घर तो कभी किसी दोस्त के घर ! जस्ट इन्टर पास किया है 9 0  परसेंट से ! 

वाणी : गुड ,कहाँ के रहने वाले हो ?

अवि अभी कुछ बोल पाता की एक माल गाड़ी की लम्बी सीटी ने माहौल में झन्नाहट ला दी !  उसने सब को ५ मिनट के लिए चुप कर दिया ! इस बीच अवि ने वाणी के iPhone  को अपने हाथों ने ले लिया !

वाणी तुम्हे पसंद आया ?

अवि : बहुत !

वाणी : रख लो !

अवि : जी , क्या ?

वाणी : तुम्हे पसंद है तो रख लो !

अवि : इतना मेहेंगा सामान आप ऐसे ही मुझे गिफ्ट कर देंगी ?

वाणी : तुम्हे पसंद है और मैं तुम्हे दे रही हूँ बस ये ही बात इम्पोर्टेंट है !

अवि : जी थैंक्स लेकिन एक और बात इम्पोर्टेंट है !

वाणी : वो क्या ?

अवि : किसी के दिए गिफ्ट को किसी और को नहीं दिया जाता !

वाणी : ये भी सही है ! तो फिर किया क्या जाये ?

अवि : कुछ नहीं मुझे थोड़ी देर इस पर गाने सुनने दीजिये ! मैं भी खुश और आप भी !

वाणी : ठीक है ,सुन लो !

बारिश और तेज़ हो चुकि थी ! रात के सवा से डेढ़ का समय होगा ! वाणी वाशरूम जाना चाहती थी ! उसने महिला कर्मचारी को कहा  मेरे साथ चलिए ! और दोनों सब कुछ अवि के भरोसे चले गए !

वाणी का मोबाईल बज उठा ! अवि ने देखा कुंदन का नाम से काल आ रही थी? कुछ देर इंतज़ार करने के बाद लगातार बजते फोन को उठा लिया और जवाब  दिया : हेलो सर !

कुंदन : हेलो , कौन ?
अपनी पत्नी के फ़ोन पर किसी और की आवाज़ और वो भी लडके की ! रात के समय ! तेज़ बारिश ! पता नहीं क्या क्या किस किस सीमा था सोचने लगा वो !

अवि : जी मैं अविरल राणा !
कुंदन : अविरल ? कौन अविरल ? और वाणी कहाँ है ?

अवि : जी वो वाशरूम गयीं हैं !

कुंदन : ओके , आपके पास फ़ोन क्यों है और आप हैं कौन ?

अवि सोचने लगा की क्या समझाऊं , क्य़ा  बताऊँ।

अवि : जी मैं वाणी जी की ही ट्रेन का हमसफ़र हूँ और ट्रेन लेट होने के कारण  हम साथ में ही वेटिंग रूम में रुके हैं ! मुझे फ़ोन अच्छा लगा इस लिए सोंग्स सुनने के लिए दिया है उन्होंने !

कुंदन : अच्छा ये बात है ! नो इस्शु वाणी के वापस आने पर कहियेगा मुझ से बात कर ले !
अवि : जी अच्छा !

और दूसरी तरफ से कुंदन ने फोन दिस्कंनेट कर दिया !

अविरल सोचने लगा क्या कुछ हो गया न इन तीन घंटो में ! कितना करीब करीब से हो गए हम सब ! जिस बात को ले कर घरों में क्या क्या ना हो जाये ये सब इतना आसानी से सुलझ गया ! तभी वाणी आती दिखाई दी ! अविरल रुक न सका ! जल्दी जल्दी बोलने लगा : आपके कुंदन जी का फ़ोन आया था ! आप उनको कॉल बक कर लीजिये !

वाणी : हलके से मुस्कुराई और बोली : ओके , अभी करती हूँ !

अवि ने कहा : आप तुरंत कीजिये !

वाणी : ठीक है लाओ फ़ोन दो !

अवि ने फ़ोन उसके हाथों में दे दिया !

वाणी : हाँ जी बोलिए !

उधर से कुछ पुछा कुंदन ने !

वाणी ने अवि से पुछा : तुम कितने साल के हो ?

अवि : जी इस साल अट्ठारह में लगूंगा !

वाणी : सुन लिया ?

कुंदन : हा हा हा !

वाणी : कैसे फ़ोन किया था ?

कुंदन : बस पूछने के लिए कहाँ तक पहुची ?

वाणी : घर पहुच कर फोन कर दूंगी , अब रखती हूँ, सब की नींद खराब हो रही है हमारी बात चीत से !

अवि को ये सब ज़रा अटपटा सा लगा !

अवि के पूछने से पहले वाणी ने कहा : हमारा कल ही डिवोर्स हो गया है !

अवि और वो महिला कर्मचारी सन्न रह गए ये सुन कर !

वाणी बोलती रही : कल ही कन्फर्म पेपर मिल गए हैं और अब मैं अपने ताऊ जी के घर अपनी माँ के पास जा रही हूँ ! शायद दूसरी शादी होगी , लेकिन इस बार एंगगेज़ेद ! कुंदन और मेरी लव मैरिज थी!
अवि अभी शायद छोटा था इन सब बातों के लिए लेकिन समझ सब रहा था और उसने पूछ लिया !

अवि : क्यों हुआ आपका डायवोर्स ?
तभी रेलवे की अनाउन्समेंट हुई की दिल्ली की गाड़ी एक घंटे में आने वाली है !!

वाणी : अवि , ये तो मुझे भी अभी तक नहीं समझ में आया !

अवि : एक साल साथ रहने के बाद !

वाणी : हाँ ! परिवार के खिलाफ हमें शादी का फैसला किया था ! क्लास 9th से हम साथ थे !
मेरे ताऊ जी के दोस्त का बेटा है वो !  स्कूल में , कालेज में सब जगह मेरा खूब ख्याल रखता था वो ! एक बार तो प्रिंसिपल मेम से मेरे लिए उसने पिटाई खायी थी ! लंच में बाहर जाना allowed  नहीं था और बाहर की चीज़  तो  बिलकुल नहीं ! एक  दिन मैंने कुंदन को शरीफा लाने  को कहा वो गार्ड से बात कर के बाहर गया और ले आया ! शाम को प्रिंसिपल ने खूब धुनाई करी हीरो की !
अवि सब सुन रहा था और बोल पड़ा : आप फिर भी इनसे दूर होना चाहती हैं ?

वाणी : आजकल वो सिर्फ काम काम पर ध्यान देते हैं !

दिन मैं सोते हैं और रात में काम ! कितनी बार तो दस दस दिनों के लिए बाहर रहते हैं  ! मुझ पर कुछ ध्यान नहीं ! क्या करती मैंने और कुंदन ने ये फैसला लिया की जब हम एक दुसरे को समय दे ही नहीं सकते तो फिर ऐसे बंधन का फायदा ही क्या !

अवि  यहाँ थोडा असहमत लगा ! उसने वाणी से उसका फ़ोन माँगा !

वाणी बोली : क्या हुआ ?

अवि दीजिये तो सही ! उसकी बोली में हक़ से गंभीरता थी!

वाणी के फ़ोन से उसने कुंदन को फ़ोन किया :

कुंदन : हाँ वाणी बोलो !

अवि : भैय्या मैं अवि बोल रहा हूँ !

कुंदन : हाँ जी हमसफ़र भाई  , बोलिए !

अवि : भैय्या , आप अभी स्टेशन आ सकते हैं ?

वाणी भी  बोली क्यों ?

कुंदन : क्यों क्या हुआ ?

अवि :  हो गया है , फ़ोन पर नहीं बता  सकता !

कुंदन : वाणी को फ़ोन दो !

अवि : नहीं , आप आइये पहले !

कुंदन : ठीक है , १/२ घंटे में पहुच रहा हूँ !

अवि : ओके एंड थैंक्स भैया !

वाणी : क्यों बुलाया उसको ?

अवि : बस आने दीजिये !

वाणी : ट्रेन आने वाली है और तुमने उसको बुला लिया !

अवि : ट्रेन तो रोज़ आती हैं , कल फिर आयगी !

वाणी : मतलब ?

अवि ने मोबाईल वाणी की तरफ बढ़ाते हुए कहा, बस अभी आया !
महिला कर्मचारी चुप चाप सब देख रही थी और शायद अवि की मंशा समझ भी रही थी !

अविरल केन्टीन की और चल दिया ! सोचते हुए ये ही कारण था की इतना महंगा iPod मुझे देने लगी थी वो ! कितनी अच्छी तो है ! इन्हें एक साथ होना चाहिए !


थोड़ी देर में कुंदन आता हुआ दिखाई दिया !

हाथों में हेलमेट देख कर अविरल ने उसे पहचान लिया और कंधे पर हाथ रखते हुए बोला : कुंदन भैया ?

कुंदन को जैसे मालूम था : हां हमसफ़र , कुंदन !

अवि : ने गले से लगा लिया कुंदन को !

कुंदन ने भी गले से लगा लिया उसको ! अनोखा नज़ारा रात के ढाई बजे रेलवे स्टेशन पर !
कुछ समोसे , पेस्ट्री और कोक की के कंटेनर ले कर दोनों वेटिंग रूम में पहुचे !

कुंदन : हेलो वाणी ! कैसी कट रही है ये बारिश की  रात वाटिंग रूम में ?

वाणी : कुछ नहीं बोली !

अविरल ने मोर्चा संभाला :  आज कोई कहीं नहीं जा रहा ! हम यहाँ आपकी दूसरी शादी की पार्टी कर रहे हैं !

कुंदन और वाणी दोनों अवाक हो कर अविरल को देख रहे थे !

उसने ये सब कुछ इतना जल्दी और बिना किसी भूमिका के कह दिया था की दोनों निःशब्द !

अवि : चलिए भाई मेरे इस रेड पेन से वाणी दीदी की मांग भरिये !

कुंदन : जरा समझो यार !

वाणी : अवि , ये सब क्या है ?

अवि : आप दोनों अलग नहीं हो रहे बस ये है सब !

कुंदन ने वाणी की तरफ लालसा भाई निगाहों से देखा ! वाणी भी शायद ऐसा कुछ चाहती थी !
दोनों गले मिले ! कुंदन ने मांग भरी लाल इंक से और सब ने तालियाँ बजाई !

वाणी के ही iPhone  से फोटो निकली गयीं बस  तभी दिल्ली वाली ट्रेन के प्लेटफोर्म पर लगने का अनाउन्समेंट हुआ !

कुंदन : कोई कहीं नहीं जा रहा !

वाणी : हाँ ये अवि भी कही नहीं जा रहा !

अवि : अरे दीदी , अरे भैया कल से मेरी क्लास शुरू हो रही हैं दिल्ली में  !

कुंदन और वाणी दोनों एक साथ बोले : हमारी क्लास यहाँ लगा कर तुम दिल्ली जाओगे !! शांत रहो और चलो हमारे साथ !

          पूरा वेटिंग रूम महकने लगा था , बंधन की खुलती गाँठ के फिर से बंधने की प्रक्रिया से ! कोक समोसे और पेस्ट्री सब के साथ चाय वाले ने चाय देनी शुरू कर दी थी !  लोग बधाई दे रहे थे और अवि iPhone पर गाने सुनता हुआ सवेरा होने का इंतज़ार करता हुआ दिल्ली की और सरकती हुई ट्रेन को देख रहा था !
             चलो भाई हमसफ़र , कुंदन और वाणी ने अवि को  पुकारा और सब घर की तरफ चल दिए !
                                                                                                                                 :: मनीष सिंह ::

Monday, June 3, 2013

एक कहानी : वो सफ़ेद शंख !!

               सब अपने अपनों की शुभयात्रा के  लिए शुभकामनाये स्वीकार कर रहे थे !
         कोई किसी को छोड़ने आया था तो कोई किसी कोई मोबाइल पर ही विदा कर रहा था ! कोई किसी के लिए खाने के पेकेट और ठंडा पानी ले कर आया था तो किसी के फ्रेंड्स अपने घर जाते हुए दोस्तों को फ़ास्ट फ़ूड की भेंट दे रहे थे , कोल्ड ड्रिंक्स के साथ साथ !
             रात के कोई दस बज कर पेंतीस ( १०:३० ) हो रहे थे और ओडिशा के पुरी के लिए जाने वाली एक प्रसिद्ध ट्रेन पुरुषोत्तम एक्स्प्रेक्स नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म से धीरे धीरे सरक रही थी ! प्लेटफोर्म की रौशनी धीरे धीरे कम हो चली थी ! आस पास बैठे लोग अब एक दूसरों में अगले लगभग तीस घंटों के लिए साथी की तलाश  करने लगे थे  जो अब तक दूर दूर थे ! एस वन ( S 1 ) की चौंतीस नंबर की बर्थ पर वो बैठा था ! खामोश ! बिना किसी के साथ ! एक तक खिड़की से बाहर देखते हुए ! बाहर बिलकुल घुप अँधेरा हो चुका , वो अब भी वैसे ही बाहर देख रहा था  !
           आधी रात के आस  पास का समय था ! कुछ लोग खाना घर से खा कर आये थे उन्होंने अपने अपने बिस्तर लगा लिए थे  ! कुछ नई उम्र के लोगो की सुबह अब हुई थी ! फेसबुक , चैटिंग सब शुरू हो चूका था , लेकिन वो भी मजबूरन सोने जा रहे थे ! इन्टरनेट का सिग्नल ठीक से नहीं मिलने के कारण ! धीरे धीरे एक के कर के ट्रेन के अन्दर की लाइट्स बंद होने लगी थी ! कोई अपने साथ चादर लाया था तो किसी को वैसे ही बर्थ अच्छी लग रही थी !

बच्चे सो रहे थे !

बड़े बच्चे एस मस एस (S M S -S M S ) खेल रहे थे !  

थोड़े और बड़े लोग बस लेटे थे और ऊँघ रहे थे , !

      लेकिन वो अब भी एक टक खिड़की से बाहर देख रहा था ! उसका हाथ अब उसके गालों पर था  ! कुछ सोचने की मुद्रा में !

ट्रेन ने अलीगढ क्रास कर रही थी ! एक छोटी बच्ची दिल्ली से  ही उस लडके को देख रही थी ! 

नीली रौशनी में रात की ख़ामोशी को उस बच्ची की मासूम आवाज़ ने तोडा !

भैया आपको छोड़ने कोई नहीं आया , आप लिए उदास हैं ?  -- बच्ची ने मासूमियत से पुछा ।

            सबका ध्यान उधर गया और सब से ज्यादा उस लकड़े की तरफ जो सब से अलग सब से दूर बैठा था ! हालाँकि सब ये मालूम तो करना चाहते तो थे की वो है कौन और सब से अलग क्यों बैठा था लेकिन कोई पहल नहीं कर पा रहा था ; उस बच्ची ने सब का प्रतिनिधितव किया !

          वो लड़का जिसकी उम्र लगभग बाईस साल के आस पास होगी : गेहेरे नीले रंग की टी शर्ट और महंगी जींस , मेहेंगे मोबाइल फ़ोन और मेहेंगे एयर बैग और महंगे लैपटॉप बैग के साथ अपनी सीट पर बैठा था ! उदास था शायद ! कुछ तलाश में था ! या फिर कुछ बहुत ही करीब का खो गया था !

बच्ची ने फिर पुछा : आप क्यों खामोश हैं भैय्या ?
किरण आप सो जाओ : बच्ची के पिता ने कहा !

बच्ची : ना ,पहले भैया से पूछो , कोई बात करो उनसे !

पिता : अच्छा मैं बात करता हूँ , तुम सो जाओ !

बच्ची : ठीक है !
और फिर बच्ची के पिता उसको चादर ओढा कर उस लडके के पास जा कर बैठते हुए बोले !
कहाँ जा रहे हो दोस्त ? क्या नाम है आपका ?

जी , मेरा नाम अनमोल है !

नाम भी आपकी ही तरह बिलकुल अलग है : वो सज्जन बोले !

अनमोल हल्का सा मुस्कुराया ! पिछले  तीन घंटों में पहली बार उसके चहरे पर कोई नया भाव आया था ! बच्ची भी मुस्कुराई और चादर ओढ़ कर करवट बदल कर सो गयी ! ऐसे जैसे कोई माँ अपने नन्हे से बेटे को सुला कर सोने जाती है ये तसाल्ली कर के की अब उसका लाडला सुकून से है !

सज्जन : कहाँ जा रहे हो ?
अनमोल : जी , पुरी , और आप लोग ?
सज्जन : हम भी वहीँ जा रहे हैं !
अनमोल : अच्छी बात है !
सज्जन : वहीँ के हो ?
अनमोल : नहीं जी , मैं बेसीकलि जमशेदपुर से हूँ ! वहां कुछ काम है !
सज्जन : काम , क्या काम करते हों ?
अनमोल : जी आय आय टी खडकपुर में केमिकल इंजीयरिंग का थर्ड इयर का स्टूडेंट हूँ !
सज्जन : अरे वाह ! दिल्ली कैसे ये थे ? कोई रिश्तेदार है यहाँ ?
अनमोल : नहीं जी बस किसी से मिलने आया था !
सज्जन : मिले ?
अनमोल : हाँ जी मिला !
सज्जन : पता नहीं लेकिन मुझे लग रहा ही की कुछ अच्छी नही रही तुम्हारी ये मुलाक़ात !!
अनमोल ने अपनी पलकें झुका ली !   ऐसा  लगा जैसे अनमोल कितनी देर से ये चाहता था की कोई उस से पूछे की क्या हुआ है !
सज्जन : वैसे जिस उम्र में तुम हो बहुत सी बातों का कुछ ज्यादा महत्व नहीं होता लेकिन कई बात बहुत  महतवपूर्ण हो जाती है ! कभी कभी तो संभाला नहीं जाये तो बात बिगड़ जाती है ! अगर हमारी इंतनी देर की बातों से तुम्हे सही लगे तो तुम मुझ से अपनी बात बता सकते हो ! मेरे भी दो बेटे हैं , जो कालेज गोइंग हैं और ये मेरी सब से छोटी बेटी है जिसे हम कभी किरण और कभी ज्योत्सना कहते हैं , जो तुमको पुकार रही थी !
अनमोल : जी ऐसा कुछ जयादा तो नहीं है , लेकिन सब ठीक भी नहीं है !
सज्जन : क्या हुआ ?

                  अब अनमोल उनके कुछ करीब आ गया था ! सज्जन ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा , बताओ हो सकता है मन हल्का हो जाये ! ट्रेन कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर रुक चुकी थी ! एक चाय वाले ने कुल्हड़ भर के दो चाय उन दोनों की तरफ बढ़ा दी ! अनमोल ने अपने बेग से बिस्किट निकाले और सज्जन जी दो देते हुए खाए ! कानपूर पीछे छूट रहा था !

अनमोल बोलने लगा !
अंकल एक दोस्त को छोड़ने आया था दिल्ली मैं ! मेरे साथ ही पढ़ती है खड़गपुर में ! बेच मेट हैं हम ! उसी को दिल्ली उसके घर छोड़ने के बाद वापस जा रहा हूँ !
सज्जन : वो तो ठीक है , तुम उदास क्यों हो ?
अनमोल : वो मेरी सब से अच्छी दोस्त है !
सज्जन :  अच्छा !
अनमोल : हम सब बात एक दुसरे को बताते हैं ! मैंने  भी सब बताया ! अपने बारे में ! असल में मैं एक अनाथालय में पल कर बड़ा हुआ और कम्पटीशन से दाखिला मिला ! हमारी दोस्ती हुई ! तीन साल से सब ठीक चल रहा है ! हम दोनों ने कई बार कई मौकों पर एक साथ देश विदेश में अपने कालेज को भी रिप्रेसेन्ट किया ! हमारी केमिस्ट्री मशहूर थी ! कई ख्वाब देखे हम दोनों ने !
सज्जन : फिर आज तुम अकेले वापस क्यों जा रहे हो ?

अनमोल : आज उसको मरी ज़रुरत नहीं !

सज्जन : क्यों ?

अनमोल : असल में कभी भी उसको मेरी ज़रुरत नहीं थी ! ऐसा मुझे ही लगता था की उसे मेरी ज़रुरत है !
सज्जन : हुआ क्या ?

अनमोल : परसों उसको मैं उसके घर ले कर उसके घर गया !  इमरजेंसी में बुलाया था उसके फादर ने , अपनी तबियत की  का बहाना कर के ! असल में उसकी सगाई करनी थी उनको !
सज्जन बड़ी तल्लीनता से उसकी बात सुन रहे थे !

अनमोल बोलता जा रहा था ! उसको तो ट्रेन में ही पता था इस बात का लेकिन उसने मुझे नहीं बताया ! मैं पुरे समर्पण के साथ उसके साथ उसके घर गया ! उसके फादर ने सिर्फ उसका सामान निकल कर मुझे जाने को कह दिया ! ऐसा तो  तो मैं सोच भी नहीं सकता था ! उसने भी नहीं कुछ कहा, सिर्फ रस्ते में रखवाला बना कर लाइ थे मुझे वो  ! दिल्ली में मुझे कोई नहीं जनता था ! कहाँ जाता ! होटल के लिए पैसे नहीं थे ! वापसी का टिकट लिया और पूरा दिन वेटिंग रूम में बिताया !  ये सोचता रहा की ऐसा क्यों किया उसने ? नहीं रहना था मेरे साथ तो मना कर दिया होता ! कॊइ ज़बरदस्ती  के  दोस्त तो थे नहीं हम !
सज्जन : मैं समझ सकता हूँ !

रात के एक बज चले थे ! आंटी जी ने धीरे  से कहा : कुछ बातें कल रात में कर लीजियगा ,अब सो जाने दीजिये अनमोल को !

हाँ हाँ ये ही ठीक रहेगा : सज्जन बोले !

अनमोल ने पुछा : आपका नाम क्या है सर ?

सज्जन : तुम अंकल बुला सकते हो ! वैसे मुझे अनिल चक्रवर्ती कहते हैं ! मेरे बड़े बेटे का नाम सोरोदीप और छोटे का काम चन्द्रदीप है , और ऊपर सो रही बिटिया का नाम ज्योत्स्ना है , घर पर किरण भी पुकारते हैं !

अनमोल मुस्कुराया !

मिस्टर अनिल ने अपने बैग से एक पेकेट  निकाल कर अनमोल की तरफ बढ़ा दिया ये कहते हुए की : तुमने शाम से कुछ नहीं खाया , ये चार पुड़ियाँ और आलू की भुजिया है अचार के साथ ! तुम्हारी आंटी किसी भी सफ़र पर ऐसे छोटे छोटे पेकेट बना कर रख लेती है  सबको आसानी होती है ! 

अनमोल माना नहीं कर सका ! उसने चारो पुड़ी खाई और पानी पी कर अपने बैग से हवा वाला तकिया निकाल कर धीरे धीरे नीचे की और सरकता हुआ सो गया !

         ट्रेन मुगलसराय स्टेशन के आस पास थी!  सर नाश्ता का ऑर्डर देंगे ? किसी ने अनमोल के कंधे पर धीरे से हाथ रखते हुए पुछा तो अनमोल की आँख खुली !

अनमोल : क्या है नाश्ते में  ?

वेंडर : उपमा , ब्रेड रोल , वेज कटलेट और आमलेट हैं !

अनमोल अभी कुछ बोलने वाला था की उसकी निगाह मिस्टर अनिल की तरफ गयी !

अनमोल : गुड मोर्निग सर !

मिस्टर अनिल : वैरी गुड मोर्निंग यंग मन ! कैसे हो ? रात अच्छी नींद आई ?

अनमोल : आप से बातें कर के मन हल्का हो गया ओर मैं अभी तक सोता रहा ! थैंक यू वैरी मच सर !

मिस्टर अनिल : कितने फॉर्मल हो यार ! ये सब चलता रहता है ज़िन्दगी में ! रात के बाद सवेरा !

रात को ही ढोते नहीं रहना चाहिए !

अनमोल : जी !

वेंडर : सर क्या लेंगे ?

अनमोल : सर आप नाश्ता कर चुके हैं ?

मिस्टर अनिल : यस डिअर !

अनमोल : एक ब्रेड आमलेट ले आओ , एक पानी की बोतल भी लाना !

वेंडर : सौ रूपए दे दीजिये !

अनमोल : ओके लो !

        ज्योत्स्ना उठ चुकी थी ! मिस्टर अनिल उसको ले कर ब्रश करवाने के लिए बाथरूम की तरफ चले! अनमोल भी फ्रेश हो कर अपनी बर्थ पर लौट चूका था ! एक मिटटी के कुल्हड़ में चाय ले कर अनमोल बाहर की तरफ देख रहा था ! मुगलसराय स्टेशन के प्लेटफार्म नम्बर तीन पर ट्रेन लग रही थी ! ट्रेन के रुकते ही कितने ही तरह के खाने पीने के सामान बेचने वाले कम्पार्टमेंट में चढ़ गए ! ज्योत्सना फलों की चाट के लिए जिद करने लगी !
        खुले में रखे सामान को दिलवाने की इक्छा बिलकुल नहीं थी मिस्टर अनिल की लेकिन ज्योत्सना रोये जा रही थी ! ट्रेन ने लम्बी सीटी दी और प्लेटफार्म से सरकने लगी ! अनमोल ने ज्योत्सना को अपने गोद में ले लिया और कम्पार्टमेंट में घुमाने लगा ! उसका ध्यान चाट से हटाने के लिए ! अच्छा ज्योत्सना ये बताओ तुम्हारे क्लास में तुम्हारा सबसे अच्छा फ्रेंड कौन है !

ज्योत्सना : विपुल !

अनमोल को लगा शायद अब ये बात काम कर जाये ! ओके वैरी गुड , तो आप अपने साथ उसको क्यों नहीं लाइ ?

ज्योत्सना : कहाँ ?

अनमोल : दिल्ली ?

ज्योत्सना : वो आया ही नहीं !

अभी ये दोनों बात कर ही रहे थे की झालमुढ़ी बेचने वाल आ गया !

ज्योत्सना अब झालमूढ़ी खाने की जिद करने लगी !

मिस्टर अनिल ने रोक लिया आन्मोल को खरीदने से : नहीं अनमोल पता नहीं कैसा तेल रहता है सरसों का इसमें !

अनमोल ने अपना हाथ पीछे खीच लिया सोचते हुए : माँ बाप कितना ध्यान रखते हैं ना अपने बच्चों के  बुरे  का ! क्या खाना है , क्या पेहेनना है , कहाँ जाना है , किस के साथ रहना है ...और पता नहीं क्या क्या !

ज्योत्सना फिर से रोने लगी :

अनमोल ने पुछा : आप एप्पल खाते हो ?

ज्योत्सना : हाँ , लेकिन ट्रेन में एप्पल तो नहीं मिलता ! हैरानी भरी आवाज़ में उसने कहा !

अनमोल : हमारे पास है !

ज्योत्सना : खूब खुश हो गयी !

               अनमोल ने अपने लेपटोप के बैग की पहली चेन से एक पेकेट निकला ! वो एप्पल नहीं था ! उस पेकेट को देख कर अनमोल फिर से उदास हो गया ! हालाँकि दूसरी बार में उसने एप्पल निकाल कर ज्योत्सना को दिया लेकिन वो पहले पेकेट के लिए जिद करने लगी !
अनमोल ने उसको वो दे दिया ! उस पेक्ट में एक " सफ़ेद शंख " था ! देख कर ज्योत्सना खूब ज़ोर से चिल्लाई : ये तो दादी के जैसा है ! मिस्टर अनिल और उसकी माँ  का ध्यान उस तरफ गया ! दोनों ने शंख देखा और अनमोल के फिर से उदास होने की बात समझ गए !

मिस्टर अनिल ने वातावरण में फिर से छाई ख़ामोशी और अनमोल की चुप्पी तो तोडा !

ज्योत्सना , बेटा वो भैय्या को दो !

ज्योत्सना : ना !
            मिस्टर अनिल ने ज्योत्सना से वो शंख लगभग छीनते हुए अनिल की तरफ बढ़ा दिया ! उस पर दो नाम लिखे थे "  अनमोल और विशाखा " !  अनमोल शंख और ज्योत्सना के बीच चल रहे खीच  - तान से दूर दो बरस पहले अपने और विशाखा के साथ वो घूमना फिरना याद करने लगा था ! ट्रेन में बस शरीर था उसका , वो खुद पुरी के समुद्र के किनारे टहल रहा था अपने उस समय को याद करते हुए ज उसने साथ बिताया था !

         एक  साल के अन्दर अन्दर दोनों अच्छे हो गए थे! क्लोज़ फ्रेंड्स ! फर्स्ट इयर कम्प्लीट करने के बाद उनका फ्रेड ग्रुप पुरी के लिए गघूमने गया था ! भगवान जग्गनाथ के दर्शन के बाद समुद्र तट पर घुमते हुए विशाखा ने एक शंख की दूकान पर चलने को कहा ! बाकि दोस्तों ने मना  कर दिया लेकिन मैं गया उसको ले कर ! एक सफेद शंख उठा लिया उसने !

विशाखा : कितने का है ?

जी : आठ सौ का !

विशाखा : अनमोल मुझे ये चाहिए !

मैंने बिना कुछ पूछे अपने स्कोलरशिप के एक हज़ार रुपए में से आठ दो रुपए दुकानदार को दे दिए !

विशाखा : मुझे इसपर अपना नाम और तुम्हारा नाम लिखवाना है !

दुकानदार बोला  वैसे तो सौ रुपए लगते हैं क्यों की हम परमानेंट इंक से लिखते हैं लेकिन आपने कोई मोल भाव नहीं किया इस लिए आपको फ्री में लिख कर देंगे !

अनमोल ने धन्यवाद दिया !

            मेरा और विशाखा का नाम उस सफ़ेद शंख पर गेहेरे लाल नीले रंग से उकेर दिया गया उस चितेरे  द्वारा ! पुरे तीन साल अपने पास रखा था उस ने वो शंख पर कल मुझे वापस कर दिया बड़ी बेरुखी से ! उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था की ऐसा हुआ क्यों , फिर से अनमोल इसी उधेड़बुन में लग गया !
            ट्रेन टाटानगर स्टेशन पर रुकी हुई थी ! उसका अनाथालय यहीं था ! कोई नहीं आया था उसको मिलने !  कुछ लोग नए आये थे कम्पार्टमेंट में और कुछ पुराने उतर गए थे !
               मिस्टर अनिल ने अनमोल से कहा ! बस ये कहूँगा अनमोल तुम उसको एक छोटे सफ़र का अस्थाई साथ समझ कर भूल सको तो अच्छा  होगा ! किसी और के लिए खाली करी गयी बर्थ पर आने वाले का स्वागत करो , कल कालेज पहुचने के बाद ! अनमोल को बात अब सीधे सीधे समझ में आ गयी ! उसने देखा  ज्योत्सना " शंख" को अपने नन्हे - नन्हे हाथो में ले कर सो गयी थी ! जैसे वक़्त को अपनी गिरफ्त में कर लिया हो उसने  , लेकिन ये समय पिछले समय को भुला कर नए शंखों की तलाश का था अनमोल के लिए  ! 
         
मिस्टर अनिल ने सबका बिस्तर लगा दिया था ,रात के खाने के बाद  !

अनमोल भी आज जल्दी सो चुका  था !

कल की तलाश में !

शंख ज्योत्सना को के पास ही था ...उसके पास ही रहेगा अब हमेशा !
                                                                                                                  :: मनीष सिंह ::