Manish Awadh Narayan Singh
Tuesday, January 31, 2012
यादें, अनुभव, टूटे सिक्के , सब कुछ था ,पर बिखरा-बिखरा !!
" चलिए उन गलियों मैं जाएँ, जिनसे अपना बचपन गुजरा,
चलिए वो शाखें छु आयें , जिनके सहारे यौवन उतरा !!
इनके उनके लाखों बंधन , जिनका होना, आवश्यकता थी,
यादें, अनुभव, टूटे सिक्के , सब कुछ था ,पर बिखरा-बिखरा !! "
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