" चरखे की आवाजें थम कर फिर चलने को कहती हैं ,
रेहेट से निकली जल की अंजुली, धरा बन कर बहती है !
आओ देखें हमने तुमने क्या-क्या कितना नाप लिया,
सीधी सांसे अपनाये और उलझे बंधन सुलझाएँ !!"
धीरे धीरे , सो जाएँ !!
रेहेट से निकली जल की अंजुली, धरा बन कर बहती है !
आओ देखें हमने तुमने क्या-क्या कितना नाप लिया,
सीधी सांसे अपनाये और उलझे बंधन सुलझाएँ !!"
धीरे धीरे , सो जाएँ !!