Thursday, July 12, 2012

क्या चलन में है .... चयनित या फिर सरकारी अक्छेपित !

             अभी कुछ दिन हुए हमारे प्रदेश उत्तर प्रदेश में निकाय ( नगर निगम ) चुनाव संपन्न हुए ! अब आप तो जानते ही हैं भारत में चुनाव का होना मतलब एक उत्सव का माहौल , सब तरफ छुट्टी और मस्ती का वातावरण और सब उत्साह से भरे हुए ....जैसा की मेले में होता है .....और इस सब के बीच कोई कोई आ कर सावधानी बरतने की नसीहत दे कर जाता , ज़रा संभल कर, कोई झगडा लड़ाई हो तो सावधान रहना !!
             एक विशेष सूचनापट लगा था एक वार्ड के मुख द्वार पर ,जिस पर कुछ जन उपयोगी सूचनाएं लिखीं थी इस चुनाव के सम्बन्ध में , जो वोट देने वालों को अपने अधिकारों का प्रयोग सही तरह से करने को मार्गदर्शित करता था !! उस पर लिखे सब वाक्यों को मेने पढ़ा किन्तु याद सिर्फ एक है जो की ग्रेषम के एक नियम जैसा लगता था ....किन्तु उतना उपयोगी भी है ये सोचने की और देखने की बात है.. आइये कुछ समझते हैं इस को नियम और उसकी आज के परिपेछ में ....!
               ग्रेषम कहते हैं की " पुराने सिक्के नए सिक्कों को चलन से बाहर  कर देते हैं ! "
और उस सुचना पट पर लिखा था - आइये अपना वोट समझदारी से दें  ताकि खोटे और बेकार नेता चलन से बाहर हो जाएँ !! बात तो सही है की गलत और बेकार चीज़ें बाहर तो होनी ही चाहियें किन्तु नियम तो नियम हैं ....और वो सिद्ध भी हैं ... खोट सिक्के तो नए सिक्कों को बाहर करते हैं ....नए उनको नहीं .....!!  किन्तु सम्भावनाये तो किसी भी चीज़ की तो सकती हैं ....!! अब देखिये ना सरकार की नीतियों के चलते कुछ लोग ऐसे उच्च पदों पर आसीन हो गए हैं जहा पर यदि वो सामान्यतः  प्रयास करते तो शायद नहीं ही पहुच सकते थे ....तो ये फिर से सिद्ध हो गया की नए और योग्य लोग चलन से बाहर ही रहते हैं ....! कभी कभी योग्यता का चयन हो भी जाये तो सरकारी डंडा फिर से आ जाता है उनको चलन में लेन के लिए ....!!
            चुनाव तो हो गए और लोग चुने भी गए किन्तु अब ये तो कुछ दिनों के बाद पता ....चलेगा चयन कैसा था ...और क्या चलन में है .... चयनित या फिर सरकारी अक्छेपित .... संभवतः .... बी चांस  बहुचलित !!

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