Wednesday, July 11, 2012

...... आजकल नहीं मिलते जीवट वाले जीवित लोग !!

पत्थरों से बात करी है कभी ?  हाँ भाई बोलते हैं वो भी ....!
कभी अजंता एलोरा या खजुराहो जाने का मौका मिले तो तजुर्बा कर लीजियेगा ! 

                  आज ये विषय नहीं की हम किस से बात कर रहे हैं ....किसी पाषाण से या फिर किसी जीवित से जिसमे जीवट हो ......!  हाँ जी शब्दों पर धयान दे कर सही करा आपने जीवित और जीवट .....सब लोग जीवित तो होते हैं जिनकी सांसे चलती हैं ....किन्तु ये ज़रूरी नहीं की उन सब में जीवट भी हो , आज विषय ये है ...जीवट वाले लोग कैसे होते हैं !!

                 कुछ दिनों पहले में एक व्यक्तिगत यात्रा पर था ...वाराणसी की ओर , लौह पथगामिनी के माध्यम से ....! एक रथ है उसी का सहारा लिया ....गरीबो का रथ , जी हैं सही बात हैं वो है तो रथ सा ...आप अपने को चोर जैसा महसूस करते हैं ...भारत में सरकारी प्रतिवेंदन और अनुमोदन के अनुसार 30 से 36 रूपए कमाने / खर्च करने वाला गरीब नहीं है ... तो में और आप जो इन्टरनेट का प्रयोग कर के ब्लॉग लिख और पढ़ रहे हैं निश्चित रूप से गरीब नहीं हैं ...और अगर हम लोग इस गरीब रथ में सफ़र करेंगे तो क्या किसी और के हक़ को क्या नहीं मार रहे ....ना ना  कर रहे हैं ....कमेन्ट करियेगा यदि कुछ सही और मन का लिखा हो तो !!....

            खैर हम जीवट वालों की बात कर रहे थे ...यात्रा में एक नोजवान मिला जिस से पहली ही मुलाक़ात में एसा लगा की इस की सोच में कुछ अलग और समाज के प्रति करने का ज़ाज़बा है ....बड़ी बड़ी बातें करी उसने ...अपने को समाज के प्रति समर्पित होने का भी उदहारण दिया ....बस इन्टरनेट के माध्यम से ....मुझे लगा की भाई इस लडके में कुछ विशेष है ....में पूरी तरह से उसके प्रति समर्पित हो गया .....क्यों न हो ...समाज के प्रति जो कुछ कर ने की इक्चा रखता हो अपने जीवन के सवार्निम समय में वो समाज के प्रति सोच रहा है ....समाज में बेरोजगार लोगो को रोजगार मिले , उसके प्रति उनको जागरूक कर रहा था, संसाधन उपलब्ध करा रहा था ....और भी पता नहीं क्या क्या .....!! सामान्य रूप से चल रही रेल गाड़ी अचानक से रुक गयी ...लगभग अँधेरा हो रहा था ...और पता करने पे पता चल गया की आगे दुर्घटना घाट गई है ...दो लोगो के ऊपर से रेल चली गयी है ....किन्तु वो जीवित हैं .....मैंने जल्दी जल्दी वहां जाने का मन किया ...में गया ....मुझ से पूर्व और लोग भी गए थे ....सुनसान इलाका ...गाड़ी में उन लोगो को रख कर अगले स्टेशन पर ले जाया गया... और बाद में पता चल गया की उनकी जान बच गयी ...भले उनके कुछ अंगों को नहीं बचाया जा सका ....इस घटना के बाद मुझे उस समाज के प्रति समर्पित नव युवक के एक और पहलु का पता चला ...की उसमे जीवट नहीं है ....वो बस परजीवी है ...सवयम कुछ नहीं कर सकता ...हर वक़्त सहारे की ज़रुरत है ....!

             वो भाई उस दुर्घटना स्थल पर नहीं गया , मैंने वापस आ कर पुछा तो भाई का उत्तर सुन कर मुझे बहुत अजीब और दुर्भाग्यपूर्ण लगा ...बोलता है ...में तो जाना चाहता था लेकिन मेरी मम्मी ने वहां जाने से मना कर दिया ....!! मेने पुछा भाई इस सफ़र में तो अकेले हो माँ कहाँ है तुम्हारी और कब मना कर गयीं ??? बोला में फ़ोन कर के पुछा था !!  वाह  रे समाज सेवक !!

            एक और से मिल चूका हूँ ...वो तो पूछने से पहले बोले में नहीं जाऊँगा ...मम्मी नहीं जाने देंगी ...... वाह भाई वाह !! परजीवी कभी जीवित होने का दावा ज़रूर कर लें किन्तु होते नहीं ....सिर्फ सांस लेते हैं और मर जाते हैं ....जीवट वाले जीवित भी रहते हैं और कभी नहीं मरते ....!! कोई ना मिलने वाला पद  जब मिल जाए चाहे किसी कारण से मिला हो ,  पर होते हुए सेवा की भावना आना संभव तो है ...किन्तु निभा पाना जीवट वाले के बस की ही बात है !!

                             ...... आजकल नहीं मिलते जीवट वाले जीवित लोग !!
  



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