" ओस की बूंदे , जुगनू , तारे सबने साथी ढूंढ लिया ,
दिनभर तपती धरती को भी चंदा ने स्पर्श किया !
पिंजरों के सब पंछी सोये , सपनों संग आज़ाद हुए ,
कल की उमीदों को हम भी अब पलकों में बो जाएँ , सो जाएँ !! "
No comments:
Post a Comment