" सोने के बर्तन मैं रखे जाने के बावजूद कोयला , कोयला ही होता है ....और दाग लगने के डर से दस्ताने पहन कर ही उसको छुआ जाता है ! आरक्षण के सहारे ऊचे पदों पर जाना आसान है किन्तु पहचान और भी मुश्किल हो जाती है ...क्यों की एक ठप्पा लग जाता है की ये स्थान आरक्षण से मिला है ...जिसके लायक कोई और था !! जो जरूरतमंद था लेकिन आरक्षण वालो के कारण एक सही और जानकार व्यक्ति देश की सेवा से चूक गया .... ये आरक्षण के सहारे से बढती जा रही कम और अनुपयुक्त लोगो की फ़ौज देश को खोखला बनाए जाने मैं सबसे प्रबल दावेदार होगी !! " सरकार को आरक्षण दिए जाने के सिस्टम पर पुनर्विचार करना चाहिए !! देश हित और आगे आने वाली पीढ़ी के हित मैं ...! "
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