" मेरी आशा , सा बढ़ता है,
मेरे आंगन का शीशम !
जिसकी छालों मैं पलती हैं,
अनुमानों की सब कलियाँ !
इसके - उसके संपर्कों से ,
अनुभव - डाली , फूल खिलें !
जिसकी छाया ऐसी जैसे ,
महका - महका सा चन्दन !!
मेरी आशा , सा बढ़ता है,
मेरे आंगन का शीशम !! "
***** सुप्रभात *****
Good Morning !!
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