Thursday, January 19, 2012

........... मेरे आंगन का शीशम !

" मेरी आशा , सा बढ़ता है,
   मेरे आंगन का शीशम !
   जिसकी छालों मैं पलती हैं,
   अनुमानों की सब कलियाँ !

  इसके - उसके संपर्कों से ,
  अनुभव - डाली , फूल खिलें !
  जिसकी छाया ऐसी  जैसे ,
  महका - महका सा चन्दन !!

  मेरी आशा , सा बढ़ता है,
  मेरे आंगन का शीशम !! "
 
   *****  सुप्रभात *****

1 comment: