" आँख खुलीं तो, कल के सपने,
मिलते आज तलाश से !
अर्थों हैं भारी, हलके पन्ने ,
लिपटे फूल पलाश के !!
स्कूल की यादें, बूढा बरगद,
दादी के मनभावन किस्से !
कल की तृष्णा, तृप्त हुई कब,
मिलती आज की आस से !! "
सुप्रभात - गुड मोर्निंग !!
मिलते आज तलाश से !
अर्थों हैं भारी, हलके पन्ने ,
लिपटे फूल पलाश के !!
स्कूल की यादें, बूढा बरगद,
दादी के मनभावन किस्से !
कल की तृष्णा, तृप्त हुई कब,
मिलती आज की आस से !! "
सुप्रभात - गुड मोर्निंग !!
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