Wednesday, December 14, 2011

........लिपटे फूल पलाश के !!

" आँख खुलीं तो, कल के सपने,
   मिलते आज तलाश से !
   अर्थों हैं भारी, हलके पन्ने ,
   लिपटे फूल पलाश के !!

   स्कूल की यादें, बूढा बरगद,
   दादी के मनभावन किस्से !
   कल की तृष्णा, तृप्त हुई कब,
   मिलती आज की आस से !! "

सुप्रभात - गुड मोर्निंग !!

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