" समुद्र कहीं- कहीं नीला और कहीं-कहीं हल्का हरा दिखाई देता है .....ये दोनों ही रंग अपने आप मैं अनोखे हैं - कहीं ....नीला शीतलता का और हरा अपना लेने का ....! किन्तु समुद्र इन रंगों अपना नहीं कह सकता , ये रंग किसी और के कारण उसको मिलते हैं .... उसका खुद का पानी पीने लायक नहीं होता , खरा होता है ! जो किसी को प्रिय नहीं !!
................. मित्रों सुप्रभात !!
................. मित्रों सुप्रभात !!
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