" उद्घोषक ने हमसे तुमसे कल मिलने की बात कही,
आधी बीती , आधी जागी अब नयनो मैं रात रही !
अंगीठी के कोयले भी अब, खुस फुस करते सोते हैं,
दिनभर दहके एकांकी हो, किसने किस से बात कही !!"
पत्थर को सिरहाना करके अब यायावर , सोते हैं ,
आओ हम भी , कुछ घंटों को इन जैसे ही हो जाएँ,
...............................................धीरे धीरे सो जाएँ !!
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