Thursday, July 21, 2011

" हम कब हम हैं जब सब हमे माने .... "

" हम कब हम हैं जब सब हमे माने .... " हाँ आप कह सकते हैं की ज़रूरत क्या है किसी से एसा कहलवाने की ? " ज़रा सोचिए अगर एसा नही है तो हम ज्ञानी होने के बावज़ूद एग्ज़ॅम क्यों देते हैं ....और सर्टिफिकेट क्यों लेते हैं....बिना आपके पास सेरटिफीकटे के आपको कोई ज्ञानी मान लेता हैं ? "
हमारे सिर्फ़ हम होने और सबके हम होने मैं फ़र्क है....जीवन अकेले अपने दम पर ही नही चलता ....हमे लगता हैं की हम सब अपने दम पर कर रहे हैं किंतु ....हमरे साथ बहुत से हम होते हैं जो हमे सब का हम बनाते हैं ...अतः सब के बानिए क्यों की आप सब की वजह से हैं ....आप के गुजरने के बाद आप को सब याद रखेंगे क्योंकि सब ने आपको बनाया और आप सब के हम हैं......अकेले के नही......यदि आप मैं कुछ है तब ही ...."

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