" आज बारिश थी !" जैसे सब के अपने अपने ईश्वर होते हौं ना उसी तरह से सब की अपनी अपनी बारिश !!
कोई सूखे खेत के लिए , कोई गर्मी से बचने के लिए , कोई अपने नये मकान की तराई के लिए ....कोई अपने कपड़ो को बचाने के किए , कोई अपने झोपडे मैं पानी ना आए इस की दुआ के साथ , कोई फाइव गार्डेन मैं भीगने के लिए और कोई एक दिन की दिहाड़ी मिलजाए के काम की तलाश मैं ...बारिश को आने पर निराशा से और कोई उसके आने को आशा से देखता है ....." सच हैं किसी के ना रहने पर ही उसकी महत्ता पता लगती है ....रहने पर तो सब अपने हित देखते हैं " वाह रे इंसान !! " जी हा मैं भी इंसान हू ...और आप भी तो !! चलिए अगली बार नये दृष्टिकोण से देखेंगे ! "
कोई सूखे खेत के लिए , कोई गर्मी से बचने के लिए , कोई अपने नये मकान की तराई के लिए ....कोई अपने कपड़ो को बचाने के किए , कोई अपने झोपडे मैं पानी ना आए इस की दुआ के साथ , कोई फाइव गार्डेन मैं भीगने के लिए और कोई एक दिन की दिहाड़ी मिलजाए के काम की तलाश मैं ...बारिश को आने पर निराशा से और कोई उसके आने को आशा से देखता है ....." सच हैं किसी के ना रहने पर ही उसकी महत्ता पता लगती है ....रहने पर तो सब अपने हित देखते हैं " वाह रे इंसान !! " जी हा मैं भी इंसान हू ...और आप भी तो !! चलिए अगली बार नये दृष्टिकोण से देखेंगे ! "
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