Monday, April 25, 2011

आओ देखें हमने तुमने क्या-क्या कितना नाप लिया !

" चरखे की आवाजें थम कर फिर चलने को कहती हैं ,
           रेहेट से निकली जल की अंजुली, धरा बन कर बहती है !
                  आओ देखें हमने तुमने क्या-क्या कितना नाप लिया,
                           सीधी सांसे अपनाये और उलझे बंधन सुलझाएँ !!"
                                                                            धीरे धीरे , सो जाएँ !!

Sunday, April 24, 2011

सन्नाटे की चादर ओढ़े रजनीगंधा महक गया !

   " सन्नाटे की चादर ओढ़े रजनीगंधा महक गया ,
                 कोई सपना न कहे की मैं अपनी राहें भटक गया !
                              आखें मूंदें , लोरी सुनते दिन के बंधन छु जाएँ ,
                                         आओ तुम हम कल फिर जागने को, सुख सपनो मैं खो जाएँ ,
                                                                                                                                   सो जाएँ !!

पिंजरों के सब पंछी सोये , सपनों संग आज़ाद हुए !

" ओस की बूंदे , जुगनू , तारे सबने साथी ढूंढ लिया ,
        दिनभर तपती धरती को भी चंदा ने स्पर्श किया !
                  पिंजरों के सब पंछी सोये , सपनों संग आज़ाद हुए ,
                           कल की उमीदों को हम भी अब पलकों में बो जाएँ , सो जाएँ !! "

Monday, April 18, 2011

" प्रतिपल उठती यौवन की भाप सरीखे हम ! "

" जाने कितनी तितलियों के पंख गिने होंगे ,
        रंग बिरंगी सीपियाँ और शंख गिने होंगे !
                  कितनी ही गौरैयाओं को स्पर्श किया होगा ,
                            आलिंगन और भावों के कई दंश दिए होंगे !"
" प्रतिपल उठती यौवन की भाप सरीखे हम !
        जी हाँ , हरपल , हरदम बिलकुल आप सरीखे हम !!"
                                                                                                   - मनीष सिंह

Monday, March 28, 2011

कल कुछ ऐसा हुआ ! जो अच्छा लगता है !!

                     कल कुछ ऐसा हुआ ! जो अच्छा लगता है !!
              " कल , जी बीता हुआ कल , दिनांक २७.०३.२०११ दिन रविवार के सुबह तकरीबन ७:४० का मैं अपनी मोटर सायकल पर दूध लेने के लिए निकला ......बहन के कहा ...सर्फ़ भी लेते आना ..." दूध लिया और सर्फ़ लेने के लिए कोई खुली हुई दूकान तलाशने लगा....अब सब हमारी तरह आराम करने के दिन ...जल्दी उठ कर अपनी सुबह खराब करेगा, लेकिन उम्मीद पे दुनिया कायम है ....तो मैं कभी वसंत रोड , सब्जी मंदी, घंटा घर , चोपला , बजरिया , और नाजाने कहाँ कहाँ ,,,,पर अपने ही लोहिया नगर के बी ब्लाक के मार्केट मैं एक दुकान मिल गयी ....जैन जी की दुकान .....

       वहां एक    बुजुर्ग खड़े थे ! रौबीला चेहरा ....सफ़ेद कुर्ता पायजामा पहने हुए ! मैं भी जयपुरी प्रिंट का फिट फिट कॉफ़ी रंग का कुर्ता और ब्लू रंग की जींस पहन राखी थी ! मैंने कुछ नहीं कहा ....और खड़ा हो गया क्यों की दूकानदार और वो बुजुर्ग बात कर रहे थे......कुछ पलों मैं दूकानदार ने मुझसे पुछा आपको क्या चाहिए ..? मैंने सर्फ़ माँगा ! दूकानदार लेने चला गया ! इस बीच उन बुजुर्ग ने मुझसे पुछा :

बुजुर्ग : कहाँ रहते हो ?
मैं : जी, लाल क्वाटर मैं .
बुजुर्ग : कब से ?
मैं : जी, बचपन से .
बुजुर्ग : अग्रवाल हो ?
मैं : जी नहीं ....छात्त्रिये हूँ.
बुजुर्ग : अच्छा ....मुझे जानते हो ?
मैं : जी.........देखा तो है आपको कोने की कोठी के बाहर कुछ और बुजुर्गों के साथ बैठे.
बुजुर्ग : हाँ बी ...... मैं रहता हूँ......तुम मुझे अच्छे से लगे इस लिए बात करने का मन किया और कर ली....
मैं : जी.....
बुजुर्ग : क्या करते हो ?
मैं : जी मैं नील.......मैं आईटी ...मैं हूँ...ग्रेटर नॉएडा !
बुजुर्ग : अच्छा मेरा बेटा भी ...अ....कंपनी मैं जेनेरल मेनेजर है......आईटी मैं ही...
तुम मुझे अच्छे से लगे और इस लिए मन किया बात करने का ....कहते हुए उन्होंने अपना उल्टा हाथ मेरे सीधे कंधे पर रख दिया .....बड़ा अदभूद एहसास था वो....

इसी बीच दूकानदार ने आवाज दी....आपका सामान !!...मैंने पैसे दिए और उन बुजुर्ग जी को नमस्ते करी और अपनी राह हो लिया !!

एसा भी होता है....!!  कोई आप को कब कहाँ मिलजाए और इतना अच्छा लगे की आप उससे बात करने का मन करने लगे ....तो अपने मन को मत  रोकिये ........बात कर लेनी चाहिए !!
                   ज़िन्दगी जीने के लिए है ...घुटन के लिए इस मैं कोई जगह नहीं होनी चाहिए ....खुश रहने और जीने का नाम ही...ज़िन्दगी है !
                                                 - आपका अपना है - मनीष

Friday, March 18, 2011

" आइये रंगों से मन बहलाएं ! "

                          " आइये रंगों से मन बहलाएं ! "
           बस अभी कुछ ही दिनों की बात ही उसको उंगली पकड़ कर टहलने ले जाया करता था ....ये क्या है , वो क्या है .. एसा क्यों है ...ये एसा क्यों नहीं है....और न जाने कितने ही तरह के बचपने के सवाल ....जिनका हर बार उत्तर मेरे पास नहीं होता था ....पर हर बार मेरा मन करता की वो ये सब मुझसे पूछे और मैं जिसका दे सकूं उत्तर दूं और बाकि के सवालों के उत्तर तलाशते हुए सो जाऊ और नए दिन की शुरुवात हो...!
           आज नया दिन है ...साल भर का त्यौहार है होली ....पर कुछ रंग नहीं हैं...कुछ हैं तो कुछ के बिना वो भी अपना वजूद तलश रहे हैं ...!
             मैं पीछे रह गया लगता हूँ ....हमेशा नहीं कभी कभी ..!! कुछ बहुत नजदीकी ही हमें इस का एहसास करते हैं....कमी हमारे मैं ही होती है की...हम समय पर नहीं समझ पाते और खुद को तकलीफ देते रहते हैं... खामख्वाह !!!!
              आप के पास दो ही चीज़ हो सकती हैं ...या तो किसी के पास रहने के अधिकार या किसी से पास से दूर होने का ...जो बीच मैं रहा उसकी तो बस परेशानी ही परेशानी होती है !
   अरे मैं ये सब क्या लिख रहा हूँ....परसों तो रंगों का त्यौहार है ...होली......उस पर बात होनी चाहिए ....और हम ये संब क्या बात करने लगे !!

              दुःख , तकलीफ , परेशानी , किसी दोस्त का दूर जाना , किसी का आपको धोखा देना...और ना जाने क्या क्या ...ये सब रंग हैं जिनसे होली खेलने का अपना मजा है !!
           
                                     हैप्पी होली , हैप्पी होली...हैप्पी होली.
                                                                                                   - मनीष

              

Monday, March 14, 2011

जापान, जी हाँ इस नाम से विकास की परिभाषा लिखी जाती है !

             जापान जी हाँ इस नाम से विकास की परिभाषा लिखी जाती है ....सामाजिक तानेबाने की सोच को नै दिशा मिलती है ....विश्व के सर्वाधिक बुजुर्गो के देश मैं आज हम प्राक्रतिक त्रासदी देख रहे हैं. हजारों जान चली गयी , सालों तक पूरा नहीं हो सकने वाला नुक्सान हुआ ! फिर भी हम अपने जापानी दोस्तों के हौसलों को सलाम करते हैं और उनके इस दुखदाई समय को सहन कर सकने और इस से उबर सकने के जज्बे को सलाम करते हैं .....इस समय मैं हम सब भारत वासी आपके साथ हैं ....जिस भी तरह की आवयश्कता होगी ...हम आपके साथ है.

               हे इश्वर हमें अपने दिए वचन पर कायम रहने और हमारे जापानी दोस्तों को इस त्रासदी को सहन करने की शक्ति दीजिये ..........हम विकास को जारी रखना चाहते हैं और अपने दिशा देने वालों की सम्पनता की कामना करते हैं. आमीन !
                                                                           हम सब भारतवासी आपके साथ हैं.