Sunday, April 24, 2011

पिंजरों के सब पंछी सोये , सपनों संग आज़ाद हुए !

" ओस की बूंदे , जुगनू , तारे सबने साथी ढूंढ लिया ,
        दिनभर तपती धरती को भी चंदा ने स्पर्श किया !
                  पिंजरों के सब पंछी सोये , सपनों संग आज़ाद हुए ,
                           कल की उमीदों को हम भी अब पलकों में बो जाएँ , सो जाएँ !! "

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