<><> हल्दी <><>
हल्दी छोड़ देती है,
अपना रंग,
अपना अपनत्व,
अपना सादगी,
अपनी कोमलता,
अपनी सुगंध,
उनके लिए, जो,
पीस लेते हैं उसे,
अपने शुभ के लिए,
अपने अशुभ में,
अपने कष्ट में,
औषधि सा !
पिस कर ,
बिखर जाती है वो,
सुबह की किरणों सी,
बिना तपिश के,
स्वयं नष्ट होते हुए,
शुभ करती हुई,
उन सब को !
हल्दी छोड़ देती है,
अपना रंग,
अपना अपनत्व,
अपना सादगी,
अपनी कोमलता,
अपनी सुगंध,
उनके लिए, जो,
पीस लेते हैं उसे,
अपने शुभ के लिए,
अपने अशुभ में,
अपने कष्ट में,
औषधि सा !
पिस कर ,
बिखर जाती है वो,
सुबह की किरणों सी,
बिना तपिश के,
स्वयं नष्ट होते हुए,
शुभ करती हुई,
उन सब को !
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