" वसंत "
ये ही नाम है उसका !
पीली सरसों के दानो सा,
दरकता जाता है...
भट्टी में ,
इसकी - उसकी,
नज़र , उतरता हुआ !!
पीलापन सरसों का,
आखों में उतार लाया है,
असमानता का ज्वर !
जिसे और अधिक,
गहरा कर देते हैं,
बसंत-पंचमी के रंग !!
::::::::::: मनीष सिंह ::::::::::
ये ही नाम है उसका !
पीली सरसों के दानो सा,
दरकता जाता है...
भट्टी में ,
इसकी - उसकी,
नज़र , उतरता हुआ !!
पीलापन सरसों का,
आखों में उतार लाया है,
असमानता का ज्वर !
जिसे और अधिक,
गहरा कर देते हैं,
बसंत-पंचमी के रंग !!
::::::::::: मनीष सिंह ::::::::::
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