Monday, February 11, 2013

कुंभ में हादसे पर एक श्रधांजलि !!

जैसे ,गरम कुल्हहड़ के किनारों से
चिपकते होठ !

आस्था की गोंद से चिपकती,
अथाह भीड़ !

आनंदित, समर्पित आत्माएं ,
चलती रहती हैं ,

साँसों के रुकने तक !
हर बार व्यवस्थाओं की अग्नि में,
आहुति ले कर ,
जीवित रहता है ;

आस्था का हवनकुंड !

जिसे , पुनः शुद्ध कर देते हैं ,
ऐसे कुंभ !!
                              :::::::::: मनीष सिंह ::::::::::::

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