" लाल पीली हरी , सुर्ख नारंगी रंग ,
घिस गयी पेन्सिलें , शब्द आलेखो संग ,
माँ की अंगुली छूटी , मन पतंग हो गया ,
तन मे बजने लगे , गीत और जल तरंग !!
व्योम जग बन गया , हम वरुण हो गये ,
बीते बचपन के दिन , अब सघन हो गये ,
आइए मान ले , हम बड़े हो गये !! "
............... हम बड़े हो गये !!
घिस गयी पेन्सिलें , शब्द आलेखो संग ,
माँ की अंगुली छूटी , मन पतंग हो गया ,
तन मे बजने लगे , गीत और जल तरंग !!
व्योम जग बन गया , हम वरुण हो गये ,
बीते बचपन के दिन , अब सघन हो गये ,
आइए मान ले , हम बड़े हो गये !! "
............... हम बड़े हो गये !!
No comments:
Post a Comment