Thursday, September 22, 2011

रीज़र्वशन से कामयाबी नही उमर भर की एहसान का तमगा मिलता है !

रिज़र्वेशन की बैसाखी के सहारे चलने वालों को कभी भी अचीवमेंट की बात नही करनी चाहिए ! 
की वो कामयाब नही होतेउनको किसी काबिल का हक मार कर आगे धक्का दिया जाता है .... ! 
उन्हे चाहिए की शर्मिंदा हों और पूरी उमर उन सब का एहसान मंद रहें जिन्होने उनके लिए अपनी जगह छोड़ दी .... ! 
सहारे और बैसाखी में अंतर है ... उतना ही जितना किसी छोटे बालक को चलना सिख़ाओ और वो चलने लगे  वो सहारा है ...
लेकिन कोई लकवा मारे इंसान को आप पल पल ढोते रहे वो है बैसाखी ..... !!  
रीज़र्वशन से कामयाबी नही उमर भर की एहसान का तमगा मिलता है जो कभी भी जस्तीफाई नही किया जेया सकता ... !  
अगर कभी कोई समूह उनको बोलने का मौका देता है का ये मतलब नही की लायक हैं ... उनको इस लायक किया गया है ... खुद में कोई काबिलियत नही !!!     

1 comment:

  1. रीज़र्वशन का मापदंड जाती या वर्ग के आधार पे करना अनुचित है, रीज़र्वशन को केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर लागू करना चाहिए ! दादा ने रीज़र्वशन लिया, फिर बाप ने,फिर बेटे ने और अब अगली पीडी ..........ये कौन सा पमाना है !

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