निर्भया .... वो तुम ही थी .... !!
दिल्ली की सड़कों पर !!
नाजाने कितना मोम , पिघला ,
दिल्ली की सड़कों पर,
न्याय दिलाने का आक्रोश, पिघला ,
दिल्ली की सड़कों पर,
तंत्र के विद्रोह में , हम सब उठे, बैठे,घूमे ,
दिल्ली की सड़कों पर,
तखितयां लिए , ढपलियाँ लिए,
खुद को जगाया ,
दिल्ली की सड़कों पर !
कल के बाद ,
फिर एक बरस बीतेगा,
तुम, याद आओगी,
दिल्ली की सड़कों पर ,
हम अब , भी घुमते हैं,
सहमे से, खबरों से,
कहीं फिर , कोई तारिख,
१६ दिसंबर न हो जाये,
दिल्ली की सड़कों पर
हमें निर्भय और ,एकजुट कर देती हो ,
कम से कम ,एक दिन तो ,
दिल्ली की सड़कों पर
निर्भया वो तुम ही थी,
निर्भया ,वो तुम ही हो.........
हम मोम सरीख़े ,
पिघलते हैं आक्रोश की तपिश से ,
रात भर ,
किन्तु, भोर तक ज़िम्मेदारियाँ बंटाते हुए,
फिर मोम हो जाते हैं ,
दिल्ली की सड़कों पर !!
:: मनीष सिंह ::
दिल्ली की सड़कों पर !!
नाजाने कितना मोम , पिघला ,
दिल्ली की सड़कों पर,
न्याय दिलाने का आक्रोश, पिघला ,
दिल्ली की सड़कों पर,
तंत्र के विद्रोह में , हम सब उठे, बैठे,घूमे ,
दिल्ली की सड़कों पर,
तखितयां लिए , ढपलियाँ लिए,
खुद को जगाया ,
दिल्ली की सड़कों पर !
कल के बाद ,
फिर एक बरस बीतेगा,
तुम, याद आओगी,
दिल्ली की सड़कों पर ,
हम अब , भी घुमते हैं,
सहमे से, खबरों से,
कहीं फिर , कोई तारिख,
१६ दिसंबर न हो जाये,
दिल्ली की सड़कों पर
हमें निर्भय और ,एकजुट कर देती हो ,
कम से कम ,एक दिन तो ,
दिल्ली की सड़कों पर
निर्भया वो तुम ही थी,
निर्भया ,वो तुम ही हो.........
हम मोम सरीख़े ,
पिघलते हैं आक्रोश की तपिश से ,
रात भर ,
किन्तु, भोर तक ज़िम्मेदारियाँ बंटाते हुए,
फिर मोम हो जाते हैं ,
दिल्ली की सड़कों पर !!
:: मनीष सिंह ::
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