अनुभव जैसे शंख ध्वनि ,
मन एकांकी होने पर !
जिज्ञासाएँ तितलियाँ,
तन हो जाता यायावर !!
इसका , उसका साथ रहे,
आशाओं के जमघट में ,
अपनों का घट रीते न ,
पलकों के नम होने से !
अंगारों सी उम्मीदे ,
रिश्ते , बर्फ खिलोनो से !
:: मनीष सिंह ::
मन एकांकी होने पर !
जिज्ञासाएँ तितलियाँ,
तन हो जाता यायावर !!
इसका , उसका साथ रहे,
आशाओं के जमघट में ,
अपनों का घट रीते न ,
पलकों के नम होने से !
अंगारों सी उम्मीदे ,
रिश्ते , बर्फ खिलोनो से !
:: मनीष सिंह ::
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