सडकों-सड़कों, जली होलिका,
गलियों-गलियों मिलन मिलन,
आँगन-आँगन ,छलके मटके ,नुक्कड़-नुक्कड़ रंग - तरंग ! "
इससे दूरी, उससे दूरी,
कब तक रखें , उलझे मन,
गुझियाँ महकीं, पापड़ चहके,
घोलो रंग - खोलो बंधन !
चुटकी- चुटकी चली सुगंधें,
माथे माथे सजी सजीं ,
सन्नाटों कि रातें गुजरीं,
प्रेम घंटियाँ बजी - बजी !
मैं तो महका, तुम भी महको,
हो , अबीर , चन्दन चन्दन !
सड़कों सड़कों जली होलिका,
गलियों-गलियों मिलन मिलन !
आँगन-आंगन छलके मटके,
नुक्कड़ नुक्क्ड़ , रंग-तरंग !
~~~~~ : मनीष सिंह
No comments:
Post a Comment