उलझे - उलझे फिरते हैं हम,
पूरे साल झमेलों में !
कंधे - कंधे टकराते हैं,
सडकों - सड़को ,रेलों में !
नुक्कड़ - नुक्कड़ मिलकर बैठें,
सुलझी - सुलझी बात करें ,
माथे -माथे, चन्दन - चन्दन,
हाथों -हाथों स्नेह मलें,
झूठ ,कपट के रावण फूकें,
आओ , शहर के मेले मैं !!
दशहरे और विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं !!
by : Manish Singh
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